भारतकोश
काव्यादर्श (महाकवि दण्डी - प्रसादिनी सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

काव्यादर्श (महाकवि दण्डी - प्रसादिनी सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Kavyadarsha of Mahakavi Dandin with Prasadini Commentary

महाकवि दण्डी द्वारा

DevanagariHindipublished270 पृष्ठ

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पृष्ठ 69

४६ काव्यादर्श [३।३६

३१. याम याम-त्रयाधीनायामया मरणं निशा । यामयाम धियाऽस्वात्यायामया मथितैव सा १ ॥ ३६ ॥ ३१. तीन पहरोंके अधीन विस्तार वाली (अर्थात् तीन पहर बची हुई, अत एव लम्बी) रातके द्वारा (इसके रहते) हम मर जायें, (यह सम्भावित है) । जिसे हम बुद्धिसे पहुँचे थे (जो मनमें बसी हुई है), प्राणपीडाकारी (प्रेम-) रोगवाली वह मर ही चुकी (होगी) ॥ ३६ ॥ यह श्लोकके मुख्य भावके विपरीत है । वादी जङ्घालदेवने रत्नश्रीप्रोक्त व्याख्याके अतिरिक्त अस्म्यता वाली व्याख्या भी दी है । तरुणवाचस्पतिने केवल 'अरम्य' छेद किया है । प्रथम पादके आदिमें दत्त 'काल' की आवृत्ति यहाँ तथा चौथे पादके आदिमें अव्यवहित रूपमें की गई है । प्रथम और चतुर्थ पादोंमें द्वितीय और तृतीय पादोंका व्यवधान भी है । इस प्रकार यह यमक अव्यपेत एवं व्यपेत दोनों प्रकार का है । इसी प्रकार द्वितीय पादके आदिमें प्रयुक्त 'तार' की भी आवृत्ति वहीं और तृतीय पादके आदिमें अव्यवहित रूपमें होनेके अतिरिक्त दोनों पादोंके मध्य चार अक्षरोंका व्यवधान भी है । अतः यह यमक भी अव्यपेत और व्यपेत दोनों प्रकारका है । (क) प्रथम और चतुर्थ, (ख) द्वितीय और तृतीय पादोंमें व्यस्त क्रमके कारण यह यमक विशेष शोभाकारक हो गया है, परन्तु उतना सुकर नहीं है ॥ ३५ ॥ ३१. (३. घ. ३) अव्यपेत-व्यपेत चतुष्पाद सजातीय यमक—इस श्लोक में अत्यधिक प्रेम करने वाली प्रियामें अत्यन्त अनुरक्त विरही पुरुषने मिलन न होनेके कारण अपनी और प्रियाकी अत्यन्त दुःखमय दशाका वर्णन किया है । इस प्रकार विप्रलम्भ रतिकी तीव्रतम पीड़ाका प्रदर्शन यहाँ किया गया है । इसमें विरही नायक कहता है कि अभी तो रातका प्रथम प्रहर ही बीता है, तीन पहर रात बाकी है । पर यह कट नहीं पायेगी । विरहज्वाला इतनी प्रबल है कि रात बीतते-न-बीतते प्राणों की बलि ले लेगी, यह लगता


१. रत्नश्री : याम-त्रयाधीनायामया निशा मरणं याम । याम् अयाम्, अस्वात्यार्या सा अधिया मया मथितैव । वादिजीने यह अन्वय भी किया हैं : स्वात्या धिया याम् अयाम, सा अयामया एव मथिता । तरुणवा०: धिया याम् अयाम, अस्वात्यायामया सा मथितैव । शेष समान है । व्याख्या देखें ।