खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)
Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary
महाकवि श्रीहर्ष द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५२४ सानुवाद खण्डनखण्डखाद्ये [ चतुर्थ नापि द्वितीयः ; ‘अस्मादयं दीर्घः' इतिवत् ‘अस्मादयं वर्तते' इत्यवध्यपेक्षा- मन्तरेण प्रतीयमानत्वात् सर्वदैव च त्रिविधावध्यपेक्षया ‘आसीदस्ति भविष्यती'ति प्रत्ययाव्यवस्थाप्रसङ्गात् । अत एव न तृतीयः । नापि चतुर्थः; अतीतानागतप्रतीतिकाले क्रियावच्छेदप्रकारेण वर्तमानप्रत्यय- विषयत्वप्रसङ्गात् । नासौ क्रियावच्छेदलक्षणः प्रकारोऽतीतानागतकाले वर्तत इति चेन्न । वर्त- मानताया अद्याप्यनिरूपणेन वर्तत इत्युक्त्वा विशेषस्य दर्शयितुमशक्यत्वात् । तत्क्रियाकाले तत्क्रियावच्छिन्नः कालो वर्तमान इति चेन्न । कालस्य काला- भी तत्क्रिया से अवच्छिन्न काल है । अतः उस क्रियारूप उपाधि की अपेक्षा उस काल में वर्तमानत्व हो जायगा, यह दोष हम बार-बार कह आये हैं । द्वितीय और तृतीय कल्प भी युक्त नहीं हैं। कारण जैसे ‘अस्मात् अयं दीर्घः' इत्यादि व्यवहार में नियमतः अवधि की अपेक्षा होती है या जैसे ‘घटात् भिन्नः पटः' इत्यादि व्यवहार में भेद प्रतियोगी की अपेक्षा करता है, वैसे ही ‘वर्तते’ इस व्यवहार में नियमतः ‘अस्मात्’ ऐसी अवधि या प्रतियोगी की अपेक्षा नहीं होती । अर्थात् ‘घटो वर्तते' ऐसा व्यवहार होता है, 'घटाद् वर्तते' ऐसा व्यवहार नहीं होता । यदि अवधि को प्रतियोगी की नियमतः अपेक्षा हो, तो 'घटाद् वर्तते' ऐसा व्यवहार भी होने लगेगा । ‘उसे क्रिया की अपेक्षा से' अर्थात् उस क्रियारूप प्रकार से, यह चतुर्थ कल्प भी अयुक्त है । कारण अतीत-अनागत व्यवहार में भी ध्वंसादि के विशेषणत्वरूप से उस क्रिया का अवच्छेद काल में है । अतः उस क्रिया-प्रकार से अतीतादि व्यवहारकाल में भी वर्तमानत्व-व्यवहार हो जायगा । समर्थन—वह क्रियारूप प्रकार अतीतादि व्यवहारकाल में वर्तमान नहीं है । लक्षण में ‘वर्तमान जो क्रियारूप प्रकार, उस प्रकार से वह काल वर्तमान है' ऐसा निवेश होने से उक्त स्थल में अतिव्याप्ति नहीं होगी । खण्डन—अभी तक वर्तमान का लक्षण न होने से वर्तमान के निवेशविशेष को आप नहीं दिखा सकते । अर्थात् वर्तमान के लक्षण में वर्तमान का प्रवेश होने से आत्माश्रय हो जायगा । समर्थन—‘उस पाकादि क्रिया-काल में उस क्रिया से अवच्छिन्न काल, उस क्रिया-प्रकार से वर्तमान है।' खण्डन—काल काल का आश्रय नहीं हो सकता, कारण