भारतकोश
संक्षिप्त कूर्मपुराण

संक्षिप्त कूर्मपुराण

Kurma Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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  • अध्याय ३८ * २१३

पुष्करे सवनस्यापि महावीतः सुतोऽभवत्। धातकिश्चैव द्वावेतौ पुत्रौ पुत्रवतां वरौ ॥ १४॥ महावीतं स्मृतं वर्षं तस्य नाम्ना महात्मनः। नाम्ना तु धातकेश्चापि धातकीखण्डमुच्यते ॥ १५॥ शाकद्वीपेश्वरस्याथ हव्यस्याप्यभवन् सुताः। जलदश्च कुमारश्च सुकुमारो मणीचकः। कुसुमोत्तरोऽथ मोदाकिः सप्तमः स्यान्महाद्रुमः ॥ १६॥ जलदं जलदस्याथ वर्षं प्रथममुच्यते। कुमारस्य तु कौमारं तृतीयं सुकुमारकम् ॥ १७॥ मणीचकं चतुर्थं तु पञ्चमं कुसुमोत्तरम्। मोदाकं षष्ठमित्युक्तं सप्तमं तु महाद्रुमम् ॥ १८॥ क्रौञ्चद्वीपेश्वरस्यापि सुता द्युतिमतोऽभवन्। कुशलः प्रथमस्तेषां द्वितीयस्तु मनोहरः ॥ १९॥ उष्णास्तृतीयः सम्प्रोक्तश्चतुर्थः प्रवरः स्मृतः। अन्धकारो मुनिश्चैव दुन्दुभिश्चैव सप्तमः। तेषां स्वनामभिर्देशाः क्रौञ्चद्वीपाश्रयाः शुभाः ॥ २०॥ ज्योतिष्मतः कुशद्वीपे सप्तैवासन् महौजसः। उद्भेदो वेणुमांश्चैवाश्वरथो लम्बनो धृतिः। षष्ठः प्रभाकरश्चापि सप्तमः कपिलः स्मृतः ॥ २१॥ स्वनामचिह्नितान् यत्र तथा वर्षाणि सुव्रताः। ज्ञेयानि सप्त तान्येषु द्वीपेष्वेवं नयो मतः ॥ २२॥ शाल्मलद्वीपनाथस्य सुताश्चासन् वपुष्मतः। श्वेतश्च हरितश्चैव जीमूतो रोहितस्तथा। वैद्युतो मानसश्चैव सप्तमः सुप्रभो मतः ॥ २३॥ प्लक्षद्वीपेश्वरस्यापि सप्त मेधातिथेः सुताः। ज्येष्ठः शान्तभयस्तेषां शिशिरश्च सुखोदयः। आनन्दश्च शिवश्चैव क्षेमकश्च ध्रुवस्तथा ॥ २४॥ प्लक्षद्वीपादिषु ज्ञेयः शाकद्वीपान्तिकेषु वै। वर्णाश्रमविभागेन स्वधर्मो मुक्तये द्विजाः ॥ २५॥ जम्बूद्वीपेश्वरस्यापि पुत्रास्त्वासन् महाबलाः। अग्नीध्रस्य द्विजश्रेष्ठास्तन्नामानि निबोधत ॥ २६॥ नाभिः किंपुरुषश्चैव तथा हरिरिलावृतः। रम्यो हिरणवांश्च कुरुर्भद्राश्वः केतुमालकः ॥ २७॥ जम्बूद्वीपेश्वरो राजा स चाग्नीध्रो महामतिः। विभज्य नवधा तेभ्यो यथान्यायं ददौ पुनः ॥ २८॥


पुष्करमें सवनको भी महावीत तथा धातकि नामक दो पुत्र हुए। पुत्रवानोंके पुत्रोंमें ये दोनों ही पुत्र श्रेष्ठ थे। उन महात्मा (महावीत)-के नामसे उस वर्षको महावीतवर्ष कहा गया है और धातकिके भी नामसे धातकिखण्ड कहा जाता है। शाकद्वीपके राजा हव्यको जलद, कुमार, सुकुमार, मणीचक, कुसुमोत्तर तथा मोदाकि एवं सातवाँ महाद्रुम नामक पुत्र हुआ॥ १४—१६॥

(इन सातों पुत्रोंके राज्यक्षेत्र इनके नामसे एक-एक वर्ष कहलाये—इसीलिये) जलदका जलद नामक प्रथम वर्ष कहा जाता है। कुमारका कौमार नामक वर्ष, इसी प्रकार तीसरा सुकुमारक (वर्ष), चौथा मणीचक, पाँचवाँ कुसुमोत्तर, छठा मोदाक और सातवाँ महाद्रुम नामक वर्ष है। क्रौञ्चद्वीपके राजा द्युतिमान्‌को भी पुत्र हुए। उनमें कुशल पहला, मनोहर दूसरा, उष्ण तीसरा पुत्र कहा गया है और चौथा पुत्र प्रवर नामसे जाना जाता है। इसी प्रकार अन्धकार (पाँचवाँ), मुनि (छठा) तथा दुन्दुभि सातवाँ पुत्र था। उनके (अपने ही) नामसे प्रसिद्ध सुन्दर देश क्रौञ्चद्वीपमें स्थित हैं। कुशद्वीपमें ज्योतिष्मान्‌को महान् ओजस्वी सात पुत्र हुए। उद्भेद, वेणुमान्, अश्वरथ, लम्बन, धृति तथा छठा प्रभाकर और सातवाँ कपिल कहा गया है॥ १७—२१॥

हे सुव्रतो! इस (कुशद्वीप)-में उनके नामसे युक्त वर्ष हैं। इसी प्रकार उन अन्य द्वीपोंमें भी स्थिति समझनी चाहिये। शाल्मलद्वीपके स्वामी वपुष्मान्‌के श्वेत, हरित, जीमूत, रोहित, वैद्युत और मानस तथा सातवें सुप्रभ नामक पुत्र थे। प्लक्षद्वीपके राजा मेधातिथिके भी सात पुत्र हुए। उनमें ज्येष्ठ पुत्र शान्तभय था। इसके अतिरिक्त शिशिर, सुखोदय, आनन्द, शिव, क्षेमक तथा ध्रुव नामक पुत्र थे॥ २२—२४॥

द्विजो! प्लक्षद्वीप आदिसे लेकर शाकद्वीपतक वर्ण और आश्रमके भेदसे स्वधर्म (पालन)-को मुक्तिका साधन समझना चाहिये। हे श्रेष्ठ द्विजो! जम्बूद्वीपके अधिपति अग्नीध्रके भी महान् बलशाली पुत्र थे, उनके नाम सुनो—नाभि, किंपुरुष, हरि, इलावृत, रम्य, हिरण्वान्, कुरु, भद्राश्व तथा केतुमालक नामक नौ पुत्र थे॥ २५—२७॥

जम्बूद्वीपेश्वर महामति उन राजा अग्नीध्रने (जम्बूद्वीपको) नौ भागोंमें बाँटकर न्यायानुसार उन (पुत्रों)-को दे दिया॥ २८॥