भारतकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

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पृष्ठ 208

अजन्त-पुंल्लिङ्ग-प्रकरणम् १६३ रामाय। ७. रामेषु। ८. रामाणाम्। ९. रामम्। १०. रामाः। ११. रामौ। १२. रामेण। १३. रामान्। (१०) क्या दोष होगा यदि — बहुवचने झल्येत् में 'बहुवचने' न हो; स्थानिवत्सूत्र में 'अनल्विधौ' न हो; अर्थवत्सूत्र में 'अप्रत्ययः' न हो; एङ्घ्रस्वात्० में 'अङ्ग' का अध्या- हार न हो। (११) निम्नस्थ सूत्रों की विस्तृत व्याख्या करें— सरूपाणामेक०, अट्कुप्वाङ्०, यस्मात्प्रत्यय०, आदेशप्रत्यययोः, प्रथमयोः पूर्व०, स्थानिवदादेशो०। ————:: ० ::———— जिन अकारान्त शब्दों में 'राम' शब्द की अपेक्षा कुछ अन्तर होता है अब उन का वर्णन करते हैं। उन में सर्वादिगण के शब्द मुख्य हैं; अतः प्रथम सर्वादि-गण दर्शाते हैं— [लघु०] सञ्ज्ञा-सूत्रम्—(१५१) सर्वादीनि सर्वनामानि १।१।२६॥ सर्वादीनि शब्दस्वरूपाणि सर्वनामसञ्ज्ञानि स्युः। सर्व। विश्व। उभ। उभय। डतर। डतम। अन्य। अन्यतर। इतर। त्वत्। त्व। नेम। सम। सिम। पूर्वपरावरदक्षिणोत्तरापराधराणि व्यवस्थायामसंज्ञायाम्। स्व- मज्ञातिधनाख्यायाम्। अन्तरं बहिर्योगोपसंव्यानयोः। त्यद्। तद्। यद्। एतद्। इदम्। अदस्। एक। द्वि। युष्मद्। अस्मद्। भवतुँ। किम्। [इति पञ्चत्रिंशत् सर्वोदयः] ॥ अर्थः—सर्व आदि शब्दस्वरूप सर्वनामसञ्ज्ञक होते हैं। व्याख्या—सर्वादीनि ।१।३। (नपुंसकलिङ्ग के कारण 'शब्दस्वरूपाणि' विशेष्य का अध्याहार किया जाता है)। सर्वनामानि ।१।३। समासः—सर्वः (सर्वशब्दः) आदिः (आद्यवयवः) येषां (शब्दस्वरूपाणाम्) तानि सर्वादीनि। तद्गुणसंविज्ञानबहुव्रीहि- समासः। अतः सर्वेषाम् (५५७), हलि सर्वेषाम् (१०६) प्रभृति सूत्रों में सर्वशब्द से भी सर्वनामकार्य (सुट्) देखा जाता है अतः सर्वशब्द की भी सर्वनामसञ्ज्ञा करने के लिये यहां 'तद्गुणसंविज्ञानबहुव्रीहि' समास मानना ही युक्त है। अर्थः—(सर्वादीनि) सर्व आदि शब्द (सर्वनामानि) सर्वनामसंज्ञक होते हैं। सर्वादिगण में पैंतीस (३५) शब्द आते हैं, जो ऊपर मूल में दिये हुए हैं। इन का श्लोकों में सङ्ग्रह यथा— सर्वान्यविश्वोभयनेमयत्तदः, किँयुष्मदस्मद्विभवत्त्यदेतदः । उभत्वतौ विज्ञजनैरुदीरितौ, समः सिमत्वान्यतरेतरा अपि ॥ १ ॥ एकैदमदसो ज्ञेया डतरो डतमस्तथा । स्वमज्ञातिधनेऽनाम्नि कालदिग्देशवृत्तयः ॥ २ ॥ ल० प्र० (१३)