लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)
Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary
आचार्य वरदराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०२ भैमीव्याख्योपेतायां लघुसिद्धान्तकौमुद्याम् दक्षिण, उत्तर, अपर, अधर' ये सात शब्द सर्वादिगण में समझे जावें। इस गणसूत्र की विशेष व्याख्या तथा पूर्वादि शब्दों की रूपमाला आगे (१५६) सूत्र पर देखें। पूर्वादियों के अनन्तर स्वम् अज्ञातिधनाख्यायाम् यह गणसूत्र आता है। इस का अर्थ है - बन्धु और धन अर्थ से भिन्न अन्य अर्थ वाला स्वशब्द सर्वादिगण में समझा जाय। इसका विशेष व्याख्यान आगे (१५७) सूत्र पर देखें। स्वशब्द के बाद अन्तरं बहिर्योगोपसंव्यानयोः यह गणसूत्र आता है। इस का अर्थ है--बाह्य और परिधानीय अर्थ वाला 'अन्तर' शब्द सर्वादिगण में समझा जाय। इस का विशेष विवरण भी आगे (१५८) सूत्र पर देखें। अन्तरशब्द के बाद त्यदादिगण आता है। त्यदादिगण सर्वादिगण के अन्तर्गत एक उपगण है, नया गण नहीं। इस में त्यद्, तद्, यद्, एतद्, इदम्, अदस्, एक, द्वि, युष्मद्, अस्मद्, भवतु, किम् ये बारह शब्द आते हैं। त्यदादियों में केवल 'एक' शब्द ही अदन्त है। यदि 'एक' शब्द सङ्ख्येयवाचक हो तो वह नित्य एकवचनान्त होता है और यदि अन्य, प्रधान, प्रथम, केवल, साधारण, समान, अल्प अर्थों¹ का वाचक हो तो इस से द्विवचन तथा बहुवचन प्रत्यय भी होते हैं। यथा- यजुष्येकेषाम् (८।३।१०२)। इस की सर्वनामसंज्ञा प्रत्येक अवस्था में होती है। प्रथम सङ्ख्येयवाची 'एक' शब्द की रूपमाला यथा- एकवचन द्विवचन बहुवचन | एकवचन द्विवचन बहुवचन प्र० एक ० ० | प० एकस्मात् ० ० द्वि० एकम् ० ० | ष० एकस्य ० ० तृ० एकेन ० ० | स० एकस्मिन् ० ० च० एकस्मै ० ० | त्यदादियों का प्रायः सम्बोधन नहीं होता। अन्य, प्रधान आदि अर्थों में 'एक' शब्द की रूपमाला यथा- एकवचन द्विवचन बहुवचन | एकवचन द्विवचन बहुवचन प्र० एक एकौ एके | प० एकस्मात् एकाभ्याम् एकेभ्यः द्वि० एकम् ,, एकान् | ष० एकस्य एकयोः एकेषाम् तृ० एकेन एकाभ्याम् एकैः | स० एकस्मिन् ,, एकेषु च० एकस्मै ,, एकेभ्यः | स० हे एक ! हे एकौ ! हे एके ! [लघु०] संज्ञा-सूत्रम्- (१५६) पूर्वपरावरदक्षिणोत्तरापराधराणि व्यवस्थायामसंज्ञायाम् ।१।१।३४॥ एतेषां व्यवस्थायामसंज्ञायां सर्वनामसंज्ञा गणसूत्रात् सर्वत्र या प्राप्ता सा जसि वा स्यात्। पूर्वे, पूर्वाः। असंज्ञायां किम् ? उत्तराः कुरवः। १ एकोऽन्यार्थे प्रधाने च प्रथमे केवले तथा । साधारणे समानेऽल्पे सङ्ख्यायाञ्च प्रयुज्यते ॥ (इति कोष )