भारतकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

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पृष्ठ 223

२०८ भैम्यिाख्ययोपेतायां लघुसिद्धान्तकौमुद्याम् तृ० उत्तरेण उत्तराभ्याम् उत्तरै | तृ० अपरेण अपराभ्याम् अपरै च० उत्तरस्मै ,, उत्तरेभ्य | च० अपरस्मै ,, अपरेभ्य प० {उत्तरस्मात् ,, ,, | प० {अपरस्मात् ,, ,, {उत्तरात् | {अपरात् ष० उत्तरस्य उत्तरयो उत्तरेषाम् | ष० अपरस्य अपरयो अपरेषाम् स० {उत्तरस्मिन् ,, उत्तरेषु | स० {अपरस्मिन् ,, अपरेषु {उत्तरे | {अपरे स० हे उत्तर ! हे उत्तरौ ! {हे उत्तरे ! | स० हे अपर ! हे अपरौ ! {हे अपरे ! {हे उत्तरा ! | {हे अपरा ! (७) अधर (नीचा आदि) | (८) स्व (आत्मा, आत्मीय) प्र० अधर अधरौ {अधरे | प्र० स्व स्वौ {स्वे {अधरा | {स्वा द्वि० अधरम् ,, अधरान् | द्वि० स्वम् ,, स्वान् तृ० अधरेण अधराभ्याम् अधरै | तृ० स्वेन स्वाभ्याम् स्वै च० अधरस्मै ,, अधरेभ्य | च० स्वस्मै ,, स्वेभ्य प० {अधरस्मात् ,, ,, | प० {स्वस्मात् ,, ,, {अधरात् | {स्वात् ष० अधरस्य अधरयो अधरेषाम् | ष० स्वस्य स्वयो स्वेषाम् स० {अधरस्मिन् ,, अधरेषु | स० {स्वस्मिन् ,, स्वेषु {अधरे | {स्वे स० हे अधर ! हे अधरौ ! {हे अधरे ! | स० हे स्व ! हे स्वौ ! {हे स्वे ! {हे अधरा ! | {हे स्वा ! (९) अन्तर (बाह्य या परिधानीय) प्र० अन्तर अन्तरौ {अन्तरे | ष० अन्तरस्य अन्तरयो अन्तरेषाम् {अन्तरा | स० {अन्तरस्मिन् ,, अन्तरेषु द्वि० अन्तरम् ,, अन्तरान् | {अन्तरे तृ० अन्तरेण अन्तराभ्याम् अन्तरै | स० हे अन्तर ! हे अन्तरौ ! {हे अन्तरे ! च० अन्तरस्मै ,, अन्तरेभ्य | {हे अन्तरा ! प० {अन्तरस्मात् ,, ,, | यहां पूर्व आदि ६ शब्द समाप्त होते हैं ॥ {अन्तरात् [लघु०] सञ्ज्ञा-सूत्रम्—(१६०) प्रथमचरमतयाल्पाद्धंकतिपयनेमाश्च ।१।१।३२ ॥ एते जसि उक्तसञ्ज्ञा वा स्यु । प्रथमे, प्रथमा । तय प्रत्यय —द्वितये, द्वितया । शेषं रामवत् । नेमे, नेमा । शेष सर्ववत् ॥