भारतकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

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पृष्ठ 288

अजन्त-पुंल्लिङ्ग-प्रकरणम् २७३ उपलब्ध संस्कृत-साहित्य में इस के प्रयोगों के उपलब्ध न होने से इस के अर्थ में बड़ा विवाद है। कई इस का अर्थ सर्पविशेष वा वज्र करते हैं, कोई इसे वानर वा सूर्यवाची मानते हैं। अजादि विभक्तियों में ओः सुँपि (२१०) से प्राप्त यण् का न भूसुधियोः (२०२) से निषेध हो जाता है। तब अग्रिमवार्त्तिक से पुनः यण् का विधान करते हैं— [लघु०] वा०—(२०) दृन्करपुनःपूर्वस्य भुवो यण् वक्तव्यः ॥ दृन्भ्वौ । एवं करभूः ॥ अर्थः—अजादि सुँप् परे होने पर दृन्, कर और पुनर् पूर्व वाले 'भू' शब्द के स्थान पर यण् आदेश करना चाहिये । व्याख्या—यह वार्त्तिक वर्षाभ्वश्च (२११) सूत्र पर महाभाष्य में पढ़ा गया है। दृन्भू, करभू और पुनर्भू शब्दों के ऊकार को यण् हो अजादि सुँप् परे हो तो—यह इस वार्त्तिक का तात्पर्य है। 'दृन्भू' शब्द को इस वार्त्तिक से अजादि सुँप् में यण् हो जाता है। रूपमाला यथा— प्र० दृन्भूः दृन्भ्वौ दृन्भ्वः | प० दृन्भ्वः दृन्भूभ्याम् दृन्भूभ्यः द्वि० दृन्भ्वम् ” ” | प० ” दृन्भ्वोः दृन्भ्वाम् तृ० दृन्भ्वा दृन्भूभ्याम् दृन्भूभिः | स० दृन्भ्वि ” दृन्भूषु च० दृन्भ्वे ” दृन्भूभ्यः | सं० हे दृन्भूः ! हे दृन्भ्वौ ! हे दृन्भ्वः ! इसी प्रकार करभू और पुनर्भू शब्दों के रूप बनते हैं। करे भवतीति करभूः (नख = नाखून), पुनर्भवतीति पुनर्भूः (पुनः पैदा होने वाला)। कर और पुनर् के उपपद रहते भू सत्तायाम् (भ्वा० प०) धातु से क्विँप् प्रत्यय करने पर करभू और पुनर्भू शब्द निष्पन्न होते हैं। अजादि विभक्तियों में पूर्वोक्त वार्त्तिक से यण् हो जाता है। रूपमाला यथा— करभू | पुनर्भू प्र० करभूः करभ्वौ करभ्वः | प्र० पुनर्भूः पुनर्भ्वौ पुनर्भ्वः द्वि० करभ्वम् ” ” | द्वि० पुनर्भ्वम् ” ” तृ० करभ्वा करभूभ्याम् करभूभिः | तृ० पुनर्भ्वा पुनर्भूभ्याम् पुनर्भूभिः च० करभ्वे ” करभूभ्यः | च० पुनर्भ्वे ” पुनर्भूभ्यः प० करभ्वः ” ” | प० पुनर्भ्वः ” ” ष० ” करभ्वोः करभ्वाम् | ष० ” पुनर्भ्वोः पुनर्भ्वाम् स० करभ्वि ” करभूषु | स० पुनर्भ्वि ” पुनर्भूषु सं० हे करभूः! हे करभ्वौ! हे करभ्वः! | सं० हे पुनर्भूः! हे पुनर्भ्वौ! हे पुनर्भ्वः! सूचना—'पुनः व्याही हुई स्त्री' इस अर्थ में 'पुनर्भू' शब्द नित्यस्त्रीलिङ्ग होता है, पुंल्लिङ्ग नहीं। स्त्रीलिङ्ग में इस का उच्चारण सिद्धान्त-कौमुदी में देखना चाहिये । ल० प्र० (१८)