भारतकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

पृष्ठ 291, कुल 633 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 291

२७६ भैमीव्याख्योपेतायां लघुसिद्धान्तकौमुद्याम् शब्द — अर्थ | शब्द — अर्थ अध्येतृ = पढ़ने वाला | बोद्धृ = जानने वाला कथयितृ = कहने वाला | भर्तृ = स्वामी या पति कर्तृ = करने वाला | भेत्तृ = तोड़ने वाला क्रेतृ = खरीदने वाला | भोक्तृ = खाने वाला क्षत्तृ = सारथि या द्वारपाल | योद्धृ = युद्ध करने वाला खनितृ = खोदने वाला | रक्षितृ = रक्षा करने वाला गणयितृ = गिनने वाला | रचयितृ = रचने वाला गन्तृ = जाने वाला | वक्तृ = बोलने वाला ग्रहीतृ = ग्रहण करने वाला | वसितृ = पहनने वाला छेत्तृ = काटने वाला | वस्तु = रहने वाला जेतृ = जीतने वाला | विक्रेतृ = बेचने वाला ज्ञातृ = जानने वाला | वेत्तृ = जानने वाला तरितृ = तैरने वाला | वोढृ = उठाने वाला त्रातृ = बचाने वाला | शङ्कितृ = शङ्का करने वाला त्वष्टृ = विश्वकर्मा | शमयितृ = शान्त करने वाला दातृ = देने वाला | शयितृ = सोने वाला दोग्धृ = दोहने वाला | शामितृ = शान्त करने वाला द्रष्टृ = देखने वाला | श्रोतॄ = सुनने वाला धर्तृ = धारण करने वाला | मवितृ = सूर्य या प्रेरक ध्यातृ = ध्यान करने वाला | सान्त्वयितृ = सान्त्वना देने वाला नप्तृ = पोता या दोहता | सोढृ = सहन करने वाला नेतृ = नेता या सञ्चालक | स्खलितृ = स्खलित होने वाला नेष्टृ = ऋत्विग्विशेष | स्तोतृ = स्तुति करने वाला पक्तृ = पकाने वाला | स्थातृ = ठहरने वाला पठितृ = पढ़ने वाला | स्नातृ = स्नान करने वाला पातृ = रक्षक या पीने वाला | स्मर्तृ = स्मरण करने वाला पूजयितृ = पूजने वाला | स्रष्टृ = पैदा करने वाला पोतृ = ऋत्विग्विशेष | हन्तृ = मारने वाला प्रशास्तृ = ऋत्विग् या राजा | हर्तृ = हरने वाला प्रष्टृ = पूछने वाला | होतृ = यज्ञ करने वाला [लघु०] एवं नप्तृरादयः ॥ व्याख्या—नप्तृ, नेष्टृ, त्वष्टृ, क्षत्तृ, होतृ, पोतृ और प्रशास्तृ शब्दों के रूप भी धातृ शब्द के समान होंगे। सम्बुद्धिभिन्न सर्वनामस्थान परे होने पर अप्तृन्तृच्० (२०६)