लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)
Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary
आचार्य वरदराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२७६ भैमीव्याख्योपेतायां लघुसिद्धान्तकौमुद्याम् शब्द — अर्थ | शब्द — अर्थ अध्येतृ = पढ़ने वाला | बोद्धृ = जानने वाला कथयितृ = कहने वाला | भर्तृ = स्वामी या पति कर्तृ = करने वाला | भेत्तृ = तोड़ने वाला क्रेतृ = खरीदने वाला | भोक्तृ = खाने वाला क्षत्तृ = सारथि या द्वारपाल | योद्धृ = युद्ध करने वाला खनितृ = खोदने वाला | रक्षितृ = रक्षा करने वाला गणयितृ = गिनने वाला | रचयितृ = रचने वाला गन्तृ = जाने वाला | वक्तृ = बोलने वाला ग्रहीतृ = ग्रहण करने वाला | वसितृ = पहनने वाला छेत्तृ = काटने वाला | वस्तु = रहने वाला जेतृ = जीतने वाला | विक्रेतृ = बेचने वाला ज्ञातृ = जानने वाला | वेत्तृ = जानने वाला तरितृ = तैरने वाला | वोढृ = उठाने वाला त्रातृ = बचाने वाला | शङ्कितृ = शङ्का करने वाला त्वष्टृ = विश्वकर्मा | शमयितृ = शान्त करने वाला दातृ = देने वाला | शयितृ = सोने वाला दोग्धृ = दोहने वाला | शामितृ = शान्त करने वाला द्रष्टृ = देखने वाला | श्रोतॄ = सुनने वाला धर्तृ = धारण करने वाला | मवितृ = सूर्य या प्रेरक ध्यातृ = ध्यान करने वाला | सान्त्वयितृ = सान्त्वना देने वाला नप्तृ = पोता या दोहता | सोढृ = सहन करने वाला नेतृ = नेता या सञ्चालक | स्खलितृ = स्खलित होने वाला नेष्टृ = ऋत्विग्विशेष | स्तोतृ = स्तुति करने वाला पक्तृ = पकाने वाला | स्थातृ = ठहरने वाला पठितृ = पढ़ने वाला | स्नातृ = स्नान करने वाला पातृ = रक्षक या पीने वाला | स्मर्तृ = स्मरण करने वाला पूजयितृ = पूजने वाला | स्रष्टृ = पैदा करने वाला पोतृ = ऋत्विग्विशेष | हन्तृ = मारने वाला प्रशास्तृ = ऋत्विग् या राजा | हर्तृ = हरने वाला प्रष्टृ = पूछने वाला | होतृ = यज्ञ करने वाला [लघु०] एवं नप्तृरादयः ॥ व्याख्या—नप्तृ, नेष्टृ, त्वष्टृ, क्षत्तृ, होतृ, पोतृ और प्रशास्तृ शब्दों के रूप भी धातृ शब्द के समान होंगे। सम्बुद्धिभिन्न सर्वनामस्थान परे होने पर अप्तृन्तृच्० (२०६)