भारतकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

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अजन्त-स्त्रीलिङ्ग-प्रकरणम् २८५ (६) गो, रै और ग्लौ शब्दों का उच्चारण लिखते हुए गाः, गौः, राभ्याम् और ग्लावि प्रयोगों की ससूत्र साधनप्रक्रिया लिखें। (७) 'गोः' और 'गो:' इन दो में कौन सा पद व्याकरणसम्मत है? (८) 'अजन्ताः' यहां कुत्व क्यों नहीं होता? -----:: ० ::----- इति भैमीव्याख्योपेतायां लघु-सिद्धान्त- कौमुद्याम् अजन्त-पुंल्लिङ्ग- प्रकरणं समाप्तम् ॥ अथाऽजन्त-स्त्रीलिङ्ग-प्रकरणम् अजन्त-पुंल्लिङ्ग शब्दों के अनन्तर अब अजन्त-स्त्रीलिङ्ग शब्दों का विवेचन प्रारम्भ किया जाता है। शब्दों का विवेचन प्रत्याहारक्रम से हुआ करता है। यथा— अ = अकारान्त, आकारान्त। इ = इकारान्त, ईकारान्त। उ = उकारान्त, ऊकारान्त। ऋ = ऋकारान्त, ॠकारान्त। ऌ = ॡकारान्त। ए = एदन्त। ओ = ओदन्त। ऐ = ऐदन्त। औ = औदन्त। तो इस प्रकार सर्वप्रथम अकारान्तों का नम्बर आता है, परन्तु स्त्रीलिङ्ग में कोई शब्द अकारान्त नहीं रह सकता; क्योंकि सर्वत्र अजाद्यतष्टाप् (१२४५) द्वारा अदन्तों से 'टाप्' प्रत्यय हो जाता है। 'टाप्' के अनुबन्धों का लोप हो कर सवर्णदीर्घ करने से आकारान्त शब्द बन जाता है। अतः सर्वप्रथम आकारान्त शब्दों का ही विवेचन किया जायेगा। [लघु०] रमा ॥ व्याख्या—रमुँ क्रीडायाम् (भ्वा० आ०) धातु से नन्दिग्रहिपचादिभ्यो ल्युणि- न्यचः (७८६) सूत्र द्वारा 'अच्' प्रत्यय करने पर 'रम' शब्द बन जाता है। तब स्त्रीत्व की विवक्षा में 'टाप्' प्रत्यय हो कर अनुबन्धों का लोप और सवर्णदीर्घ करने से 'रमा' शब्द निष्पन्न होता है। 'रमा' का अर्थ है 'लक्ष्मी'। 'रमा' शब्द से स्वादिप्रत्ययों की उत्पत्ति प्रातिपदिकसञ्ज्ञा किये बिना ही हो जाती है; क्योंकि स्वादिप्रत्यय जैसे प्रातिपदिक से परे होते हैं वैसे ङ्यन्त और आवन्त से परे भी होते हैं (देखें सूत्र ११६)। 'रमा + स्' (सुँ) यहां 'रमा' शब्द आवन्त (टावन्त) है, अतः इस से परे हल्ङ्याब्भ्यो० (१७६) सूत्र द्वारा अपृक्त सकार का लोप हो कर 'रमा' प्रयोग सिद्ध होता है। यहां विभक्ति का लोप होने पर भी प्रत्ययलोपे प्रत्ययलक्षणम् (१६०) द्वारा पदसञ्ज्ञा तो रहेगी ही। विभक्ति लाने का फल भी यही है।