भारतकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

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३२६ | भैमीव्याख्योपेतायां लघुसिद्धान्तकौमुद्याम्

आदेश, अनुबन्धलोप, उस की सर्वनामस्थानसञ्ज्ञा, नपुंसकस्य झलच (२३६) से नुँम् का आगम तथा नान्त अङ्ग की उपधा को दीर्घ कर 'ज्ञानानि' सिद्ध होता है। नोट—नपुंसकलिङ्ग मे प्राय प्रथमा और द्वितीया विभक्ति के रूप तथा उन की प्रक्रिया एक समान हुआ करती है। अत आगे प्रथमा विभक्ति की ही सिद्धि करेंगे, उस से द्वितीया की भी सिद्धि समझ लेनी चाहिये। नपुंसक मे प्राय तृतीयादि विभक्तियों के रूप पुंल्लिङ्ग के समान होते हैं, अत' वहा उन की भी सिद्धि नही करेंगे। हा जहा कुछ विशेष होगा वहा पूरी २ प्रक्रिया लिखेंगे। ज्ञान शब्द की रूपमाला यथा— प्र० ज्ञानम् ज्ञाने ज्ञानानि | प० ज्ञानात् ज्ञानाभ्याम् ज्ञानेभ्यः द्वि० " " " | ष० ज्ञानस्य ज्ञानयोः ज्ञानानाम् तृ० ज्ञानेन ज्ञानाभ्याम् ज्ञानैः | स० ज्ञाने " ज्ञानेषु च० ज्ञानाय " ज्ञानेभ्य | सं० हे ज्ञान ! हे ज्ञाने ! हे ज्ञानानि ! [लघु०] एवं धन-वन-फलादयः ॥ अर्थः—इसी तरह धन, वन, फल आदि अदन्त नपुंसको के रूप होते हैं। व्याख्या—बालको की ज्ञानवृद्धि के लिये ज्ञानवत् अदन्तनपुंसक शब्दो का कुछ उपयोगी सङ्ग्रह यहा दे रहे हैं। '*' यह चिह्न णत्वप्रक्रिया का परिचायक है।

शब्द—अर्थशब्द—अर्थशब्द—अर्थ
अक्षर* = अकारादि वर्णअहिफेन = अफीमऐक्य = एकता
अगार* = गृहअंशुक = महीन वस्त्रओदन = भात
अग्निहोत्र* = होमआधिक्य = ज्यादतीऔत्सुक्य = उत्कण्ठा
अघ = पापआनन = मुखकङ्कण = कंगन
अङ्ग = अवयवआर्जव = सरलताकज्जल = काजल
अञ्जन = सुरमाआर्द्रक* = अदरककनक = सुवर्ण, धतूरा
अनृत = झूठआसन = आसनकमल = कमल
अन्तरिक्ष* = आकाशआस्य = मुखकाञ्चन = सुवर्ण
अन्त पुर* = रनवासइङ्गित = इशाराकार्य* = काम
अभ्र* = बादलइन्दीवर* = नीला कमलकुण्ड = हौदी
अभ्रक* = अभ्रकइन्द्रजाल = माया वा छलकुमुद = श्वेत कमल
अमृत = जल, अमृतइन्द्रिय* = नेत्र आदिकौटिल्य = कुटिलता
अम्भोज = पद्मइन्धन = लकड़ीक्षीर* = दूध
अम्ल = छाछ, खट्टाउदक = जलक्षेत्र* = खेत
अरण्य = जगलउदर* = पेटख = आकाश
अरविन्द = पद्मउद्यान = बगीचागवेषण = खोज
अवसान = विरामउपवन = ,,गौरव* = गुरुत्व, प्रतिष्ठा
अस्त्र* = बाण आदिऋत = दैवी सत्यचन्दन = चन्दन