लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)
Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary
आचार्य वरदराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअजन्त-नपुंसकलिङ्ग-प्रकरणम् ३२७ शब्द—अर्थ | शब्द—अर्थ | शब्द—अर्थ चरण = पैर (पुं० भी) | नेत्र* = आंख | रामठ = हीङ्ग चरित = चालचलन | नैपुण्य = निपुणता | रूप्य* = चान्दी चाञ्चल्य = चञ्चलता | पङ्कज = कमल | लक्षण = भेददर्शक चातुर्य* = निपुणता | पत्र* = पत्ता | ललाट = माथा चामीकर* = सुवर्ण | पाण्डित्य = विद्वत्ता | ललाम = प्रधान, सुन्दर चिबुक = ठोड़्डी | पानीय = पानी | लवङ्ग = लौंग चिह्न = निशान | पार्थक्य = जुदाई | लवण = नमक चौर्य* = चोरी | पुष्प* = फूल | लवित्र* = दरांती जठर* = पेट | पैशुन्य = चुगलखोरी | लशुन = लहसुन जल = पानी | फल = फल | लाङ्गल = हल जाड्य = मूर्खता | बाल्य = लड़कपन | लाङ्गूल = पूंछ जातिफल = जयफल | बीज = कारण | लाघव = हलकापन जाम्बूनद = सोना | भक्त = भात, सेवक | लालन = लाड करना टङ्कण = सुहागा | भय = डर | लालित्य = सौन्दर्य तत्त्व = यथार्थ रूप | भाल = मस्तक | लेख्य = दस्तावेज़ तथ्य = सत्य | भुवन = लोक | वक्त्र* = मुख तन्त्र* = शास्त्र | भोजन = खुराक | वङ्ग = रांगा, कली ताम्बूल = पान | मन्दिर* = घर | वचन = कथन तारुण्य = जवानी | मार्दव = कोमलता | वज्र* = इन्द्र का अस्त्र तिमिर* = अन्धकार | मित्र* = मित्र | वन = जंगल तुत्थ = नीला थोथा | मुख = मुंह | वसन = वस्त्र तृण = तिनका | मूल्य = दाम, कीमत | वाक्य = वाक्य तैल = तेल | मौन = चुप्पी | वाङ्मय = शास्त्र तोक = सन्तान | यन्त्र* = कल वा औज़ार | वाद्य = बाजा तोय = पानी | यवस = घास, तृण | वार्त्त = तन्दुरुस्ती दाक्षिण्य = चतुरता | युद्ध = लड़ाई | वार्धक्य = बुढ़ापा दास्य = दासता | योजन = चार कोस | वासर* = दिन (पुं० भी) दुर्भिक्ष* = अकाल | यौतक = दहेज | वाहन = सवारी दुःख = दुःख | यौतुक = दहेज | वितुन्नक = धनियां देवमन्दिर* = देवालय | यौवत = युवति-समूह | विवर* = छिद्र, बिल दैव = भाग्य | यौवन = जवानी | विश्वभेषज = सोंठ द्वार* = दरवाज़ा | रजत = चान्दी | विष* = जहर धन = धन | रत्न = मणि | वीर्य* = बल, पराक्रम नयन = आंख | रहस्य = गोप्य | वृत्त = चरित्र नवनीत = माखन | राज्य = राज