भारतकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

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पृष्ठ 385

३७० भैमीव्याख्योपेतायां लघुसिद्धान्तकौमुद्यां अर्थः—विभक्ति परे होने पर किम् के स्थान पर 'क' आदेश हो । व्याख्या—किम ।६।१। क ।१।१। विभक्तौ ।७।१। (अष्टन आ विभक्तौ से) । अर्थ —(विभक्तौ) विभक्ति परे होने पर (किम ) 'किम्' शब्द के स्थान पर (क ) 'क' आदेश हो । 'क' आदेश सस्वर होने से अनेकाल् है अत अनेकाल्परिभाषा (४५) से सम्पूर्ण 'किम्' के स्थान पर होगा । इस से सर्वत्र स्वादियो में किम् को 'क' आदेश हो सर्वशब्दवत् प्रक्रिया होती है । ध्यान रहे कि 'क' आदेश स्थानिवद्भाव से सर्वनामसञ्ज्ञक है । रूपमाला यथा— प्र० क कौ के† प० कस्मात्* काभ्याम् केभ्य द्वि० कम् ,, कान् ष० कस्य कयो केषाम् × तृ० केन काभ्याम् कैः स० कस्मिन्* ,, केषु च० कस्मै† ,, केभ्य सम्बोधन नही होता । † जस शी (१५२) । † सर्वनाम्न स्मै (१५३) । *ङसिंङ्यो स्मात्स्मिनौ (१५४) । ×आमि सर्वनाम्नः सुँट् (१५५) । इदम् = यह (निकटतम)¹ । इन्देः कमिर्नलोपश्च (उणा० ५६६) इति सिद्ध्यति । 'इदम्' शब्द भी सर्वादिगण में पठित होने से सर्वनामसञ्ज्ञक है । यह त्रिलिङ्गी है । यहा पुल्लिङ्ग का प्रकरण होने से पुल्लिङ्ग में रूप दर्शाए जाते हैं— इदम् + सु (सुँ) । यहा त्यदादीनामः (१६३) सूत्र से 'इदम्' के मकार को अकार प्राप्त होता है । इस पर अग्रिमसूत्र निषेध करता है— [लघु०] विधि-सूत्रम्— (२७२) इदमो मः ।७।२।१०८॥ इदमो मस्य म स्यात्सी परे । त्यदाद्यत्वापवाद ॥ अर्थः—सुँ परे होने पर इदम् शब्द के मकार को मकार आदेश हो । त्यदाद्य- त्वापवाद —यह सूत्र त्यदादियो के स्थान पर होने वाले अत्व का अपवाद है । व्याख्या—इदम ।६।१। म ।१।१। (मकारादकार उच्चारणार्थ ) । सौ ।७।१। (तदोः स सावनन्त्ययो से) । अर्थ —(इदम ) इदम् शब्द के स्थान पर (मः) म् आदेश हो (सौ) सुँ परे होने पर । यह मकारादेश अलोऽन्त्यपरिभाषा से इदम् शब्द के अन्त्य अल् = मकार के स्थान पर ही होता है । मकार को पुनः मकार आदेश करने का तात्पर्य त्यदादीनाम (१६३) सूत्र द्वारा प्राप्त अकारादेश का निषेध करना है, अर्थात् इदम् का मकार मकाररूपेण ही स्थित रहता है, सुं परे होने पर उसके स्थान पर अन्य कुछ आदेश नही होता । १ इदमस्तु सन्निकृष्टे, समीपतरवत्ति चैतदो रूपम् । अदसस्तु विप्रकृष्टे, तदिति परोक्षे विजानीयात् ॥ इदम् शब्द का प्रयोग निकटतम—जिसे अङ्गुली से बताया जा सके—के लिए एतद् का निकटतर के लिये, अदस् का दूरस्थ के लिये और तद् का परोक्ष—जो दिखाई न दे—के लिये होता है ।