भारतकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

पृष्ठ 471, कुल 633 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 471

४५६ भैमीव्याख्योपेतायां लघुसिद्धान्तकौमुद्यां (४) अभ्यस्त शतृन्त। इस श्रेणी में ददत्, दधत् प्रभृति जुहोत्यादिगण के शतृन्त तथा जक्षत् आदि अदादिगण के सात शतृन्त सम्मिलित हैं। बालकों के अभ्यासार्थ कुछ तकारान्त शब्द नीचे सार्थ लिखे जाते हैं। इन के आगे १, २, ३, ४ के अङ्क इन की उपर्युक्त श्रेणी के बोधक हैं— १ विद्यावान् (२) = विद्वान् । १३ विचारवान् (२) = विचार वाला २ पचत् (३) = पकाता हुआ । १४ मधुमत् (२) = मिठासयुक्त, मीठा ३ वेविषत् (४) = व्याप्त होता हुआ । १५ सुमहत् (१) = बहुत वडा ४ चकासत् (४) = चमकता हुआ। । १६ जुह्वत् (४) = होम करता हुआ ५ भक्तिमत् (२) = भक्तिवाला, भक्त । १७ भूतवत् (२) = हो चुका हुआ ६ महत् (१) = वडा । १८ पृच्छत् (३) = पूछता हुआ ७ नेनिजत् (४) = शुद्ध करता हुआ । १९ शासत् (४) = शासन करता हुआ ८ गुणवत् (२) = गुणो वाला, गुणी । २० हतवत् (२) = मार चुका हुआ ६ दरिद्रत् (४) = दरिद्र होता हुआ । २१ जहत् (४) = छोड़ता हुआ १० चिन्तयत् (३) = सोचता हुआ । २२ दीव्यत् (३) = चमकता हुआ ११ जाग्रत् (४) = जागता हुआ । २३ वेव्यत् (४) = जाता हुआ १२ विचारयत् (३) = विचार करता हुआ । २४ सृष्टवत् (२) = पैदा कर चुका हुआ (यहां तकारान्त पुल्लिङ्ग शब्दों का विवेचन समाप्त होता है।) अभ्यास (४४) (१) अभ्यस्तसंज्ञा का सूत्र लिख कर इस संज्ञा का प्रयोजन स्पष्ट करें। (२) जक्षित्यादयः षट् में षट् कहने पर भी सात धातुएं कैसे हो जाती हैं? (३) उभे अभ्यस्तम् में 'उभे' ग्रहण का क्या प्रयोजन है? (४) सर्वनामसंज्ञक भवत् तथा शतृन्त भवत् शब्दों में क्या अन्तर है? (५) तकारान्त पुल्लिङ्ग चार प्रकार के हैं—सोदाहरण स्पष्ट करें। (६) भवतुं शब्द की सर्वनामसंज्ञा क्यो की जाती है? (७) जक्षित्यादि सात धातुएं कौन सी हैं? (८) अनन्तरस्य विधिर्वा० परिभाषा का सोदाहरण विवेचन करें। (६) सान्तमहतः संयोगस्य और उभे अभ्यस्तम् सूत्रो की व्याख्या करें। (१०) उभे अभ्यस्तम् सूत्र में स्वरसन्धि क्यो नहीं हुई? (११) निम्नलिखित रूपों की सूत्रनिर्देशपूर्वक साधनप्रक्रिया लिखें— भवान्, महान्तौ, धीमन्त, ददतम्, जक्षती। (१२) प्राणवन्, जाग्रत्, अतिमहत्, बिभ्यत्, अधीतवन्, धनवत्—इन शब्दो - की प्रथमा के एकवचन में साधनप्रक्रिया दर्शाते हुए रूपमाला लिखें। (१३) नुम् की अपेक्षा अत्वसन्तस्य० पहले क्यो प्रवृत्त हो जाता है?