लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)
Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary
आचार्य वरदराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहलन्त-पुंल्लिङ्ग-प्रकरणम् ४७६ (२) व्याख्या करें— (क) सम्बोधने तूशनसस्त्रिरूपं सान्तं तथा नान्तमथाप्यदन्तम् । (ख) आन्तरतम्याद् ह्रस्वस्य उः, दीर्घस्य ऊः । (ग) अकृतव्यूहाः पाणिनीयाः । (घ) अदस औ सुलोपश्च, अदसोऽसेर्दादु दो मः, वसोः सम्प्रसारणम् । (३) पुंसु, वेधोभ्याम्, अमी, विद्वद्ऋचाम्, अमुना, श्रेयांसौ, अमू, तस्थुषः, अमु- ष्मिन्, विद्वन्—इन रूपों की ससूत्र साधनप्रक्रिया लिखें । (४) एत ईद् बहुवचने सूत्र की व्याख्या करते हुए—बहुवचनपद पारिभाषिक नहीं यौगिक है—इसे स्पष्ट करें । (५) अनुस्वार का पाठ हल्प्रत्याहार में नहीं आता तो पुनः 'पुंस् + भ्याम्' में कैसे संयोगसञ्ज्ञा होकर संयोगान्तलोप हो जाता है ? (६) इन शब्दों का प्रथमैकवचन सिद्ध कर रूपमाला लिखें— वनीकस्, उशनस्, अनेहस्, पुंस्, वेधस्, श्रेयस्, अदस् । (७) पूर्वत्रासिद्धम् द्वारा कार्यासिद्ध और शास्त्रासिद्ध पक्षों में से किस पक्ष का प्रतिपादन होता है—सोदाहरण व्याख्या करें । (८) न मु ने की व्याख्या करते हुए 'कर्त्तव्ये कृते च' कथन को स्पष्ट करें । (९) पुंस् और विद्वस् शब्दों की प्रकृतिप्रत्ययनिर्देशपुरःसर निष्पत्ति लिखें । (१०) पुंसोऽसुँङ् सूत्र पर—'सर्वनामस्थान परे होने पर' ऐसा न कहकर 'सर्व- नामस्थाने विवक्षिते' ऐसा क्यों कहा गया है ? (११) असान्त अदस् शब्द के दकार से परे हल् वर्ण को क्या आदेश होता है ? सप्रमाण समझाएं । (१२) अ त्वसन्तस्य चाधातोः में 'अधातोः' ग्रहण का क्या प्रयोजन है ? (१३) निम्नस्थ शब्दों का सम्बुद्धि में रूप सिद्ध करें— पुंस्, उशनस्, वेधस्, विद्वस्, अनेहस् । ———: : ० : : ——— इति भैमीव्याख्योपेतायां लघु-सिद्धान्त- कौमुद्यां हलन्त-पुंल्लिङ्ग- प्रकरणं समाप्तम् ॥