भारतकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

पृष्ठ 494, कुल 633 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 494

हलन्त-पुंल्लिङ्ग-प्रकरणम् ४७६ (२) व्याख्या करें— (क) सम्बोधने तूशनसस्त्रिरूपं सान्तं तथा नान्तमथाप्यदन्तम् । (ख) आन्तरतम्याद् ह्रस्वस्य उः, दीर्घस्य ऊः । (ग) अकृतव्यूहाः पाणिनीयाः । (घ) अदस औ सुलोपश्च, अदसोऽसेर्दादु दो मः, वसोः सम्प्रसारणम् । (३) पुंसु, वेधोभ्याम्, अमी, विद्वद्ऋचाम्, अमुना, श्रेयांसौ, अमू, तस्थुषः, अमु- ष्मिन्, विद्वन्—इन रूपों की ससूत्र साधनप्रक्रिया लिखें । (४) एत ईद् बहुवचने सूत्र की व्याख्या करते हुए—बहुवचनपद पारिभाषिक नहीं यौगिक है—इसे स्पष्ट करें । (५) अनुस्वार का पाठ हल्प्रत्याहार में नहीं आता तो पुनः 'पुंस् + भ्याम्' में कैसे संयोगसञ्ज्ञा होकर संयोगान्तलोप हो जाता है ? (६) इन शब्दों का प्रथमैकवचन सिद्ध कर रूपमाला लिखें— वनीकस्, उशनस्, अनेहस्, पुंस्, वेधस्, श्रेयस्, अदस् । (७) पूर्वत्रासिद्धम् द्वारा कार्यासिद्ध और शास्त्रासिद्ध पक्षों में से किस पक्ष का प्रतिपादन होता है—सोदाहरण व्याख्या करें । (८) न मु ने की व्याख्या करते हुए 'कर्त्तव्ये कृते च' कथन को स्पष्ट करें । (९) पुंस् और विद्वस् शब्दों की प्रकृतिप्रत्ययनिर्देशपुरःसर निष्पत्ति लिखें । (१०) पुंसोऽसुँङ् सूत्र पर—'सर्वनामस्थान परे होने पर' ऐसा न कहकर 'सर्व- नामस्थाने विवक्षिते' ऐसा क्यों कहा गया है ? (११) असान्त अदस् शब्द के दकार से परे हल् वर्ण को क्या आदेश होता है ? सप्रमाण समझाएं । (१२) अ त्वसन्तस्य चाधातोः में 'अधातोः' ग्रहण का क्या प्रयोजन है ? (१३) निम्नस्थ शब्दों का सम्बुद्धि में रूप सिद्ध करें— पुंस्, उशनस्, वेधस्, विद्वस्, अनेहस् । ———: : ० : : ——— इति भैमीव्याख्योपेतायां लघु-सिद्धान्त- कौमुद्यां हलन्त-पुंल्लिङ्ग- प्रकरणं समाप्तम् ॥