लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)
Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary
आचार्य वरदराज द्वारा
पृष्ठ 500, कुल 633 में से
संदर्भ में पढ़ेंहलन्त-स्त्रीलिङ्ग-प्रकरणम् ४८५ इदम् + स् (सुँ) । यहां प्रकृतसूत्र से दकार को यकार हो कर हल्ङ्याब्भ्यः० .(१७६) से सुँ का लोप हो जाता है—इयम्। ध्यान रहे कि यहां इदमो मः (२७२) के निषेध के कारण त्यदाद्यत्व नहीं होता। इदम् + औ। त्यदाद्यत्व, पररूप, अजाद्यतष्टाप् (१२४५) से टाप्, अनुबन्ध- लोप कर सवर्णदीर्घ करने से—इदा+औ। अब दश्च (२७५) सूत्र से दकार को मकार, औङ आपः (२१६) से औकार को शी, अनुबन्धलोप तथा गुण करने पर— इमे । इदम् + अस् (जस्) । त्यदाद्यत्व, पररूप, टाप्, सवर्णदीर्घ तथा दश्च (२७५) से दकार को मकार होकर—इमा + अस् । अब दीर्घाज्जसि च (१६२) से पूर्वसवर्ण- दीर्घ का निषेध होकर अकः सवर्णे दीर्घः (४२) से सवर्णदीर्घ तथा सकार को रुँत्व विसर्ग करने से—इमाः। इदम् + अम् । त्यदाद्यत्व, पररूप, टाप्, सवर्णदीर्घ, दश्च (२७५) सूत्र से दकार को मकार तथा अमि पूर्वः (१३५) से पूर्वरूप होकर—इमाम्। इदम् + अस् (शस्) । त्यदाद्यत्व, पररूप, टाप्, सवर्णदीर्घ तथा दकार को मकार होकर पूर्वसवर्णदीर्घ करने से—इमास् = इमाः। नोट—जस् में सवर्णदीर्घ और शस् में पूर्वसवर्णदीर्घ यह ज्ञातव्य है। इदम् + आ (टा) = इद + आ = इदा + आ । अब यहां अनाप्यकः (२७६) सूत्र से इद् भाग को अन् आदेश, आङि चापः (२१८) से प्रकृति के आकार को एकार तथा एचोऽयवायावः (२२) से अय् आदेश करने पर—अनया । इदम् + भ्याम् = इद + भ्याम् = इदा + भ्याम् । हलि लोपः (२७७) से इद् भाग का लोप होकर—आभ्याम् । इसी प्रकार—आभिः। इदम् + ए (ङे) = इद + ए = इदा + ए । अब सर्वनामसञ्ज्ञा होकर प्रथम नित्य होने से सर्वनाम्नः स्याड्ढ्रस्वश्च (२२०) सूत्र से स्याट् आगम और आप् को ह्रस्व हो जाता है—इद + स्या ए। अब वृद्धिरेचि (३३) से वृद्धि और हलि लोपः (२७७) से इद् भाग का लोप करने से—अस्यै। इदम् + अस् (ङसिँ वा ङस्) = इद + अस् = इदा + अस्। यहां भी पूर्ववत् सर्वनामसञ्ज्ञा, स्याट् आगम तथा आप् को ह्रस्व होकर—इद + स्या अस् । अब अकः सवर्णे दीर्घः (४२) से सवर्णदीर्घ तथा हलि लोपः (२७७) से इद् का लोप होकर— अस्यास् = अस्याः । इदम् + ओस् = इद + ओस् = इदा + ओस् । अनाप्यकः (२७६) से इद् को अन् आदेश, आङि चापः (२१८) से आप् की एकार तथा एकार को अय् आदेश करने पर—अनयोः। इदम् + आम् = इद + आम् = इदा + आम् । सर्वनामसञ्ज्ञा होकर आमि सर्वनाम्नः सुँट् (१५५) से सुँट् का आगम तथा हलि लोपः (२७७) से इद् का लोप हो जाता है—आसाम् ।