भारतकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

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पृष्ठ 89

७४ भैमीव्याख्योपेतायां लघुसिद्धान्तकौमुद्याम् (३) विष्णूदय (विष्णो —तन्नामदेवविशेषस्य, सूर्यस्य वा उदय =आवि- र्भाव उन्नतिर्वा विष्णूदय, विष्णु या सूय का उदय)। विष्णु+उदय यहा णकारोत्तर उकार 'अक्' है, इस से परे 'उदय' शब्द का आदि उकार सवर्ण अच् है अत पूर्व+ पर के स्थान पर 'ऊ' यह सवर्ण दीर्घ एकादेश करने स---विष्ण् ऊ' दय='विष्णूदय' प्रयोग सिद्ध होता है। (४) होतॄकार' (होतृऋकार = होतॄकार । होता का ऋकार) । 'होतृ+ ऋकार यहा पूर्व+पर के स्थान पर ऋ' यह एक सवर्ण दीर्घ हो कर—होतृ ऋ' कार='होतॄकार प्रयोग सिद्ध होता है। ऌकार का उदाहरण अप्रसिद्ध तथा कठिन होने से यहा नही दिया गया, सिद्धान्तकौमुदी म दिया गया है, वही देखें। यह सूत्र अकार के विषय मे आद् गुण (२७) सूत्र का तथा अन्यत्र इको यणचि (१५) सूत्र का अपवाद है। अभ्यास (१०) (१) निम्नस्थ प्रयोगों म सन्धिविच्छेद कर सूत्रो द्वारा उसे सिद्ध करें— १ दण्डाग्रम्। २ मधूदके। ३ दधीन्द्र । ४ होतॄश्य । ५ कुमारीहते । ६ पितॄणम्। ७ विद्यानन्द । ८ भूमीश । ६ परमार्थ । १० यथार्थ । ११ विधूदय । १२ विद्यार्थी । १३ महीन । १४ वेदाभ्यास । १५ कमलाकर । १६ कर्तॄणि । १७ भानूदय । १८ पक्तॄजीपम् । १६ तरूध्व॑म् । २० गिरीश । (२) अधो लिखित रूपा म सूत्रार्थसमन्वय करते हुए सन्धि करें— १ कदा+अगात् । २ महती+इच्छा । ३ हरि+इन्द्र । ४ मधु+ उत्तमम् । ५ कर्तृ+ऋद्धि । ६ सनक+आदि । ७ फलानि+ इमानि । ८ कारु+उत्तम । ६ प्रति+ईक्षते । १० वधू+उत्सव । ११ कदा+अत्र । १२ सती+ईश । १३ श्रद्धा+अस्ति । १४ मुनि+इन्द्र । १५ अन्त+आदि । १६ यदा+आसीत् । १७ नदी+इदानीम् । १८ तरु+उपेत । १६ भ्रातृ+ऋद्धि । २० तुल्य+आस्य । (३) अक सवर्णे दीर्घ सूत्र किस २ सूत्र का अपवाद है ? [लघु०] विधि-सूत्रम्—(४३) एड पदान्तादति।६।१।१०५॥ पदान्तादेङोऽति परे पूर्व-रूपम् एकादेश स्यात् । हरेऽव । विष्णोऽव ॥ अर्थ—पदान्त एङ् से अत् परे हो तो पूर्व+पर के स्थान पर पूर्वरूप एकादेश हो । व्याख्या—पदान्तात् ।५।१। एङ ।५।१। अति ।७।१। पूर्व-परयो ।६।२। एकः ।१।१। (एक पूर्व-परयो यह अधिकृत है)। पूर्व ।१।१। (अमि पूर्व से) । अर्थ —