भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

पृष्ठ 10, कुल 2256 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 10

प्रतिज्ञा
५१- जनमेजयके सर्पयज्ञका उपक्रम ५२- सर्पसत्रका आरम्भ और उसमें सर्पोंका विनाश ५३- सर्पयज्ञके ऋत्विजोंकी नामावली, सर्पोंका भयंकर विनाश, तक्षकका इन्द्रकी शरणमें जाना तथा वासुकिका अपनी बहिनसे आस्तीकको यज्ञमें भेजनेके लिये कहना ५४- माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना ५५- आस्तीकके द्वारा यजमान, यज्ञ, ऋत्विज्, सदस्यगण और अग्निदेवकी स्तुति-प्रशंसा ५६- राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना ५७- सर्पयज्ञमें दग्ध हुए प्रधान-प्रधान सर्पोंके नाम ५८- यज्ञकी समाप्ति एवं आस्तीकका सर्पोंसे वर प्राप्त करना

(अंशावतरणपर्व)

५९- महाभारतका उपक्रम ६०- जनमेजयके यज्ञमें व्यासजीका आगमन, सत्कार तथा राजाकी प्रार्थनासे व्यासजीका वैशम्पायनजीसे महाभारत-कथा सुनानेके लिये कहना ६१- कौरव-पाण्डवोंमें फूट और युद्ध होनेके वृत्तान्तका सूत्ररूपमें निर्देश ६२- महाभारतकी महत्ता ६३- राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा ६४- ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश

(सम्भवपर्व)

६५- मरीचि आदि महर्षियों तथा अदिति आदि दक्षकन्याओंके वंशका विवरण ६६- महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन ६७- देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन ६८- राजा दुष्यन्तकी अद्भुत शक्ति तथा राज्यशासनकी क्षमताका वर्णन ६९- दुष्यन्तका शिकारके लिये वनमें जाना और विविध हिंसक वन-जन्तुओंका वध करना