महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रतिज्ञा
५१- जनमेजयके सर्पयज्ञका उपक्रम
५२- सर्पसत्रका आरम्भ और उसमें सर्पोंका विनाश
५३- सर्पयज्ञके ऋत्विजोंकी नामावली, सर्पोंका भयंकर विनाश, तक्षकका इन्द्रकी शरणमें जाना तथा वासुकिका अपनी बहिनसे आस्तीकको यज्ञमें भेजनेके लिये कहना
५४- माताकी आज्ञासे मामाको सान्त्वना देकर आस्तीकका सर्पयज्ञमें जाना
५५- आस्तीकके द्वारा यजमान, यज्ञ, ऋत्विज्, सदस्यगण और अग्निदेवकी स्तुति-प्रशंसा
५६- राजाका आस्तीकको वर देनेके लिये तैयार होना, तक्षक नागकी व्याकुलता तथा आस्तीकका वर माँगना
५७- सर्पयज्ञमें दग्ध हुए प्रधान-प्रधान सर्पोंके नाम
५८- यज्ञकी समाप्ति एवं आस्तीकका सर्पोंसे वर प्राप्त करना
(अंशावतरणपर्व)
५९- महाभारतका उपक्रम ६०- जनमेजयके यज्ञमें व्यासजीका आगमन, सत्कार तथा राजाकी प्रार्थनासे व्यासजीका वैशम्पायनजीसे महाभारत-कथा सुनानेके लिये कहना ६१- कौरव-पाण्डवोंमें फूट और युद्ध होनेके वृत्तान्तका सूत्ररूपमें निर्देश ६२- महाभारतकी महत्ता ६३- राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा ६४- ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश
(सम्भवपर्व)
६५- मरीचि आदि महर्षियों तथा अदिति आदि दक्षकन्याओंके वंशका विवरण ६६- महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन ६७- देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन ६८- राजा दुष्यन्तकी अद्भुत शक्ति तथा राज्यशासनकी क्षमताका वर्णन ६९- दुष्यन्तका शिकारके लिये वनमें जाना और विविध हिंसक वन-जन्तुओंका वध करना