महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 22, कुल 2256 में से
संदर्भ में पढ़ें३९- सहदेवकी राजाओंको चुनौती तथा क्षुब्ध हुए शिशुपाल आदि नरेशोंका युद्धके लिये उद्यत होना
(शिशुपालवधपर्व)
४०- युधिष्ठिरकी चिन्ता और भीष्मजीका उन्हें सान्त्वना देना ४१- शिशुपालद्वारा भीष्मकी निन्दा ४२- शिशुपालकी बातोंपर भीमसेनका क्रोध और भीष्मजीका उन्हें शान्त करना ४३- भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन ४४- भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना ४५- श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन
(द्यूतपर्व)
४६- व्यासजीकी भविष्यवाणीसे युधिष्ठिरकी चिन्ता और समत्वपूर्ण बर्ताव करनेकी प्रतिज्ञा ४७- दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना ४८- पाण्डवोंपर विजय प्राप्त करनेके लिये शकुनि और दुर्योधनकी बातचीत ४९- धृतराष्ट्रके पूछनेपर दुर्योधनका अपनी चिन्ता बताना और द्यूतके लिये धृतराष्ट्रसे अनुरोध करना एवं धृतराष्ट्रका विदुरको इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश ५०- दुर्योधनका धृतराष्ट्रको अपने दुःख और चिन्ताका कारण बताना ५१- युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन ५२- युधिष्ठिरको भेंटमें मिली हुई वस्तुओंका दुर्योधनद्वारा वर्णन ५३- दुर्योधनद्वारा युधिष्ठिरके अभिषेकका वर्णन ५४- धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना ५५- दुर्योधनका धृतराष्ट्रको उकसाना ५६- धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, द्यूतक्रीड़ाके लिये सभानिर्माण और धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको बुलानेके लिये विदुरको आज्ञा देना ५७- विदुर और धृतराष्ट्रकी बातचीत ५८- विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना ५९- जूएके अनौचित्यके सम्बन्धमें युधिष्ठिर और शकुनिका संवाद