महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1291, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंरत्नाकरास्तथा नद्यस्तेषां नामानि मे शृणु ।
**संजय बोले—**राजन्! शाकद्वीपमें भी मणियोंसे विभूषित सात पर्वत हैं। वहाँ रत्नोंकी बहुत-सी खानें तथा नदियाँ भी हैं। उनके नाम मुझसे सुनिये ।। १३ १/२ ।।
अतीव गुणवत् सर्वं तत्र पुण्यं जनाधिप ।। १४ ।।
देवर्षिगन्धर्वयुतः प्रथमो मेरुरुच्यते ।
प्रागायतो महाराज मलयो नाम पर्वत: ।। १५ ।।
जनेश्वर! वहाँका सब कुछ परम पवित्र और अत्यन्त गुणकारी है। वहाँका प्रधान पर्वत है मेरु, जो देवर्षियों तथा गन्धर्वोंसे सेवित है। महाराज! दूसरे पर्वतका नाम मलय है, जो पूर्वसे पश्चिमकी ओर फैला हुआ है ।। १४-१५ ।।
ततो मेघाः प्रवर्तन्ते प्रभवन्ति च सर्वशः ।
ततः परेण कौरव्य जलधारो महागिरिः ।। १६ ।।
मेघ वहींसे उत्पन्न होते हैं, फिर वे सब ओर फैलकर जलकी वर्षा करनेमें समर्थ होते हैं। कुरुनन्दन! उसके बाद जलधार नामक महान् पर्वत है ।। १६ ।।
ततो नित्यमुपादत्ते वासवः परमं जलम् ।
ततो वर्षं प्रभवति वर्षकाले जनेश्वर ।। १७ ।।
जनेश्वर! इन्द्र वहींसे सदा उत्तम जल ग्रहण करते हैं। इसीलिये वर्षाकालमें वे यथेष्ट जल बरसानेमें समर्थ होते हैं ।। १७ ।।
उच्चैर्गिरी रैवतको यत्र नित्यं प्रतिष्ठिता ।
रेवती दिवि नक्षत्रं पितामहकृतो विधिः ।। १८ ।।
उसी द्वीपमें उच्चतम रैवतक पर्वत है, जहाँ आकाशमें रेवती नामक नक्षत्र नित्य प्रतिष्ठित है। यह ब्रह्माजीका रचा हुआ विधान है ।। १८ ।।
उत्तरेण तु राजेन्द्र श्यामो नाम महागिरिः ।
नवमेघप्रभः प्रांशुः श्रीमानुज्ज्वलविग्रहः ।। १९ ।।
राजेन्द्र! उसके उत्तर भागमें श्याम नामक महान् पर्वत है, जो नूतन मेघके समान श्याम शोभासे युक्त है। उसकी ऊँचाई बहुत है। उसका कान्तिमान् कलेवर परम उज्ज्वल है ।। १९ ।।
यतः श्यामत्वमापन्नाः प्रजा जनपदेश्वर ।
जनपदेश्वर! वहाँ रहनेसे ही वहाँकी प्रजा श्यामताको प्राप्त हुई है ।। १९ १/२ ।।
धृतराष्ट्र उवाच
सुमहान् संशयो मेऽद्य प्रोक्तोऽयं संजय त्वया ।
प्रजाः कथं सूतपुत्र सम्प्राप्ताः श्यामतामिह ।। २० ।।