भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 1812

वरदान पानेके कारण उनका घमंड बढ़ गया था। वे विभिन्न स्थानोंमें देवताओं और उनके गणोंको भगाकर वहाँ अपनी इच्छाके अनुसार विचरते थे॥ ३४॥ देवोद्यानानि सर्वाणि प्रियाणि च दिवौकसाम्। ऋषीणामाश्रमान् पुण्यान् रम्याञ्जनपदांस्तथा ॥ ३५ ॥ व्यनाशयन्मर्यादा दानवा दुष्टचारिणः। स्वर्गवासियोंके परम प्रिय समस्त देवोद्यानों, ऋषियोंके पवित्र आश्रमों तथा रमणीय जनपदोंको भी वे मर्यादाशून्य दुराचारी दानव नष्ट-भ्रष्ट कर देते थे॥ ३५ १/२॥ (निःस्थानाश्च कृता देवा ऋषयः पितृभिः सह। दैत्यैस्त्रिभिस्त्रयो लोका ह्याक्रान्तास्तैः सुरेतरैः ॥) उन देवविरोधी तीनों दैत्योंने देवताओं, पितरों और ऋषियोंको भी उनके स्थानोंसे हटाकर निराश्रय कर दिया। वे ही नहीं, तीनों लोकोंके निवासी उनके द्वारा पददलित हो रहे थे॥ पीड्यमानेषु लोकेषु ततः शक्रो मरुद्वृतः ॥ ३६ ॥ पुराण्यायोधयांचक्रे वज्रपातैः समन्ततः। जब सम्पूर्ण लोकोंके प्राणी पीड़ित होने लगे, तब देवताओंसहित इन्द्र चारों ओरसे वज्रपात करते हुए उन तीनों पुरोंके साथ युद्ध करने लगे॥ ३६ १/२॥ नाशकत् तान्यभेद्यानि यदा भेत्तुं पुरंदरः ॥ ३७ ॥ पुराणि वरदत्तानि धात्रा तेन नराधिप। तदा भीतः सुरपतिर्मुक्त्वा तानि पुराण्यथ ॥ ३८ ॥ तैरेव विबुधैः सार्धं पितामहमरिंदम। जगामाथ तदाख्यातुं विप्रकारं सुरेतरैः ॥ ३९ ॥ शत्रुदमननरेश्वर! जब देवराज इन्द्र ब्रह्माजीका वर पाये हुए उन अभेद्य पुरोंका भेदन न कर सके, तब वे भयभीत हो उन पुरोंको छोड़कर उन्हीं देवताओंके साथ ब्रह्माजीके पास उन दैत्योंका अत्याचार बतानेके लिये गये॥ ३७—३९॥ ते तत्त्वं सर्वमाख्याय शिरोभिः सम्प्रणम्य च। वधोपायमपृच्छन्त भगवन्तं पितामहम् ॥ ४० ॥ उन्होंने मस्तक झुकाकर भगवान् ब्रह्माजीको प्रणाम किया और सारी बातें ठीक-ठीक बताकर उनसे उन दैत्योंके वधका उपाय पूछा॥ ४०॥ श्रुत्वा तद् भगवान् देवो देवानिदमुवाच ह। ममापि सोऽपराध्नोति यो युष्माकमसौम्यकृत् ॥ ४१ ॥ वह सब सुनकर भगवान् ब्रह्माने उन देवताओंसे इस प्रकार कहा—'देवगण! जो तुम्हारी बुराई करता है, वह मेरा भी अपराधी है॥ ४१॥ असुरा हि दुरात्मानः सर्व एव सुरद्विषः।