महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1820, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंउस श्रेष्ठ रथमें सूर्य और चन्द्रमाको दोनों पहिये बनाकर सुन्दर रात्रि और दिनको वहाँ पूर्वपक्ष और अपरपक्षके रूपमें प्रतिष्ठित किया ।। २७ ।।
दश नागपतीनीषां धृतराष्ट्रमुखांस्तदा ।
योक्त्राणि चक्रुर्नागांश्च निःश्वसन्तो महोरगान् ।। २८ ।।
धृतराष्ट्र आदि दस नागराजोंको भी ईषादण्डमें ही स्थान दिया। फुफकारते हुए बड़े-बड़े सर्पोंको उस रथके जोत बनाये ।। २८ ।।
द्यां युगं युगचर्माणि संवर्तकबलाहकान् ।
कालपृष्ठोऽथ नहुषः कर्कोटकधनंजयौ ।। २९ ।।
इतरे चाभवन् नागा हयानां बालबन्धनाः ।
दिशश्च प्रदिशश्चैव रश्मयो रथवाजिनाम् ।। ३० ।।
द्युलोकको भी जूएमें ही स्थान दिया। प्रलयकालके मेघोंको युगचर्म बनाया। कालपृष्ठ, नहुष, कर्कोटक, धनंजय तथा दूसरे-दूसरे नाग घोड़ोंके केसर बाँधनेकी रस्सी बनाये गये। दिशाओं और विदिशाओंने रथमें जुते हुए घोड़ोंकी बागडोरका भी रूप धारण किया ।। २९-३० ।।
संध्यां धृतिं च मेधां च स्थितिं संनतिमेव च ।
ग्रहनक्षत्रताराभिश्चर्म चित्रं नभस्तलम् ।। ३१ ।।
संध्या, धृति, मेधा, स्थिति और संनतिसहित आकाशको, जो ग्रह, नक्षत्र और तारोंसे विचित्र शोभा धारण करता है, चर्म (रथका ऊपरी आवरण) बनाया ।। ३१ ।।
सुराम्बुप्रेतवित्तानां पतींल्लोकैश्वरान् हयान् ।
सिनीवालीमनुमतिं कुहूं राकां च सुव्रताम् ।। ३२ ।।
योक्त्राणि चक्रुर्वाहानां रोहकांस्तत्र कण्टकान् ।
इन्द्र, वरुण, यम और कुबेर—इन चार लोकपालोंको देवताओंने उस रथके घोड़े बनाये। सिनीवाली, अनुमति, कुहू तथा उत्तम व्रतका पालन करनेवाली राका इनकी अधिष्ठात्री देवियोंको घोड़ोंके जोतेका रूप दिया और इनके अधिकारी देवताओंको घोड़ोंकी लगामोंके काँटे बनाया ।। ३२ १/२ ।।
धर्मः सत्यं तपोऽर्थश्च विहितास्तत्र रश्मयः ।। ३३ ।।
अधिष्ठानं मनश्चासीत् परिरथ्या सरस्वती ।
नानावर्णाश्च चित्राश्च पताकाः पवनेरिताः ।। ३४ ।।
विद्युदिन्द्रधनुर्नद्धं रथं दीप्तं व्यदीपयन् ।
धर्म, सत्य, तप और अर्थ—इनको वहाँ लगाम बनाया गया। रथकी आधारभूमि मन हुआ और सरस्वती देवी रथके आगे बढ़नेका मार्ग थीं। नाना रंगोंकी विचित्र पताकाएँ पवनसे प्रेरित होकर फहरा रही थीं, जो बिजली और इन्द्रधनुषसे बँधे हुए उस देदीप्यमान रथकी शोभा बढ़ाती थीं ।। ३३-३४ १/२ ।।