भारतकोश
मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished395 पृष्ठ

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त्रयोदशोऽध्यायः 卐 उपपीठविधानम् १२१ ✵ वेदिभद्रम् ✵ उच्छ्रये भानुभागे तु द्व्यंशेनोपानमीरितम्। पद्ममंशं तदूर्ध्वेऽर्धं क्षेपणं पञ्चभागिकम्॥६॥ ग्रीवमर्धेन कम्पं स्याद् भागैकेनाम्बुजं भवेत्। शेषांशं वाजनं कम्पमष्टाङ्गमुपपीठकम्॥७॥ ( वेदिभद्र उपपीठ दो प्रकार के होते हैं—आठ अङ्ग वाले एवं छः अङ्ग वाले। इनका वर्णन इस प्रकार है— ) उपपीठ की ऊँचाई को बारह भागों में बाँटना चाहिये। दो भाग से उपान, एक भाग से पद्म, उसके ऊपर आधे भाग से क्षेपण, पाँच भाग से ग्रीव, आधे से कम्प, एक भाग से अम्बुज तथा शेष भाग से वाजन एवं कम्प का निर्माण करना चाहिये। इस प्रकार उपपीठ के आठ अङ्ग होते हैं॥६-७॥ षडङ्गं वा विधातव्यमूर्ध्वाधस्ताद् विनाम्बुजम्। वेदिभद्रं द्विधा प्रोक्तं सर्वहर्म