मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
DevanagariHindipublished395 पृष्ठ
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सप्तमोऽध्यायः 卐 पदविन्यासः ४७ वायु, पूषा, वितथ, बृहत्क्षत ( कुछ ग्रन्थों में—गृहक्षत ), यम, गन्धर्व, भृङ्गराज, मृग, पितृगण, दौवारिक, सुग्रीव, पुष्पदन्त, जलाधिप ( वरुण ), असुर, शोष, पाप, रोग, अहि, मुख्य, भल्लाट, सोम, सर्प, अदिति एवं दिति। केन्द्रस्थ ब्रह्मा के चारो ओर कोणों में आप, सावित्र, जय एवं रुद्र तथा मध्य में अर्यमा, सविता, विवस्वान्, विबुधाधिप ( इन्द्र ), मित्र, राजयक्ष्मा, पृथिवीधर एवं आपवत्स देवता स्थित रहते हैं। प्रायः वास्तु-ग्रन्थों में देवों का यही क्रम एवं संज्ञा प्रचलित है।