मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६८ मयमतम् व्यसनं ग्रामविनाशो नृपभङ्गो भवति मरणं च। देवालयान्तरापणशून्यत्वं शोध्यसञ्चयं चापि ॥१००॥ मार्गेऽशुद्धक्षेपणमीदृग् ग्रामस्य शून्यतादायि । उपर्युक्त का दुष्परिणाम ग्राम का विनाश, राजा का भङ्ग (हानि) एवं मृत्यु होता है। देवालय एवं हाट का रिक्त होना, कूड़े का संग्रह तथा मार्ग में अशुद्ध वस्तुओं (कूड़े आदि) का फेंका जाना ग्राम को शून्य कर देता है॥१००॥ ☀ गर्भविन्यासः ☀ ग्रामादीनां च सर्वेषां गर्भविन्यासमुच्यते ॥१०१॥ शिलान्यास—सभी ग्रामादिकों के गर्भ-विन्यास का वर्णन किया जाता है॥१०१॥ सगर्भं सर्वसम्पत्त्यै विगर्भं सर्वनाशनम् । तस्मात्सर्वप्रयत्नेन गर्भं सम्यग्विनिक्षिपेत् ॥१०२॥ (ग्रामादि का) गर्भयुक्त होना सभी प्रकार की सम्पत्तियों का एवं गर्भहीन होना सभी प्रकार के विनाश का कारण होता है