भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

पृष्ठ 244, कुल 365 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 244

१८८ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह १२ में गिरधर रग राती, सैया मै। पचरग चोला पहर सखी मै झिरमिट खेलन जाती। ओह झिरमिट मा मिल्यो साव रो खोल मिली तन गाती। जिन का पिया परदेस बसत है, लिख लिख भेजे पाती। मेरा पिया मेरे हीय बसत है, ना कहू आती जाती। चदा जायगा सूरज जायगा, जायगी धरणी अकासी। पवन पाणी दोनूँ हीँ जा येगे, अटल रहै अविनासी। सुरत निरत का दिवला सजोले, मनसा की करले बाती। प्रेम हटी का तेल मगा ले, जगे रह्या दिन राती। सतगुरु मिलिया सासा भाग्या, सैन बताई साची। ना घर तेरा न घर मेरा, गावै मीराँ दासी ॥३०३॥ १३ सखी री मै तो गिरधर के रग राती। पचरग मेरा चोला रगा दे, मै झुरमट खेलन जाती। झुरमुट मे मेरा साई मिलेगा, खोल आडम्बर गाती। चदा जायगा सूरज जायगा, जायगा धरण अकासी। पावन पाणी दोनो ही जायगे, अटल रहे अविनासी। सुरत निरत का दिवला सजोले, मनसा की कर बाती। प्रेम हटी का तेल बना ले, जगा करे दिन राती। जिनके पिय परदेस बसत है, लिख लिख भेजे पाती। मेरे हिय मो माहि बसत है, कहूँ न आती जाती। पी हर बसूँ न बसूँ सास घर, सतगुरु शब्द सगाती। ना घर मेरा ना घर तेरा, मीराँ हरि रग राती ॥३०४॥ उपर्युक्त तीनो पदो की भाषा व अभिव्यक्ति विशेष विचार- णीय है। तीनो ही पदो की भाषा अपेक्षाकृत अधिक आधुनिक है