मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)
Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary
महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७८ | मृच्छकटिकम्
वसन्तसेना—सुट्ठु दे किदं। तदो तदो ?। (सुष्ठु त्वया कृतम्। ततस्ततः?)
कर्णपूरकः—तदो अज्जए ! 'साहु रे कण्णऊरअ ! साहु' त्ति एत्तिअमेत्तं भणन्ती, विसम-भर-क्कन्ता विअ णावा एक्कदो पलहत्था सअला उज्जइणी आसि। तदो अज्जए ! एक्केण सुण्णाई आहरणट्ठाणाई परामसिअ, उद्धं पेक्खिअ, दीहं णीससिअ, अअं पावारओ मम उवरि विक्खत्तो। (तत आर्ये ! 'साधु रे कर्णपूरक ! साधु' इत्येतावन्मात्रं भणन्ती विषमभराक्रान्ता इव नौः एकतः पर्यस्ता सकला उज्जयिनी आसीत्। तत आर्ये ! एकेन शून्यानि आभरणस्थानानि परामृश्य, ऊर्ध्वं प्रेक्ष्य, दीर्घं निःश्वस्य, अयं प्रावारकः ममोपरि उत्क्षिप्तः।)
वसन्तसेना—कण्णऊरअ ! जाणीहि दाव, किं एसो जादीकुसुमवासिदो पावारओ ण वेत्ति । (कर्णपूरक ! जानीहि तावत्, किमेष जातीकुसुमवासितः प्रावारको न वेति।)
कर्णपूरकः—अज्जए ! मदगन्धेण सुट्ठु तं गन्धं ण जाणामि। (आर्ये ! मदगन्धेन सुष्ठु तं गन्धं न जानामि।)
वसन्तसेना—णामं पि दाव पेक्ख। (नामापि तावत् प्रेक्षस्व।)
अर्थ—वसन्तसेना—तुमने बहुत अच्छा किया। इसके बाद ?
कर्णपूरक—इसके बाद आर्ये ! 'वाह रे कर्णपूरक। वाह' केवल इतना कहती हुई (चिल्लाती हुई), बहुत अधिक बोझ से एक ओर दबी हुई नाव के समान, सारी उज्जैन नगरी एक ओर झुक पड़ी=एकत्रित हो गयी। उसके बाद, आर्ये ! किसी एक व्यक्ति ने अपने शून्य आभरण-स्थानों (अंगों) को स्पर्श करके, ऊपर की ओर देखकर, लम्बी सांस लेकर यह उत्तरीय (दुपट्टा) मेरे ऊपर फेंक दिया।
वसन्तसेना—कर्णपूरक ! देखो क्या यह उत्तरीय चमेली के फूलों की खुशबू से सुगन्धित है अथवा नहीं ?
कर्णपूरक—आर्ये ! (हाथी के) मद की गन्ध के कारण उस गन्ध को (चमेली की गन्ध को) ठीक से नहीं सूंघ पा रहा हूँ।
टीका—साधु=प्रशंसनीयम्, भणन्ती = कथयन्ती, विषमभरेण=अत्यधिकभारेण, आक्रान्ता=युक्ता, नौः=नौका, सकला=सम्पूर्णा, एकतः=एकस्यां दिशि, पर्यस्ता=आनता, एकत्रितितेति च, शून्यानि=आभूषणरहितानि, आभरणस्थानानि=अलङ्काराणां स्थानानि=अवयवान्, परामृश्य=संस्पृश्य, प्रेक्ष्य=विलोक्य, निःश्वस्य=निःश्वासं गृहीत्वा, प्रावारकः = उत्तरीयम्, उत्क्षिप्तः = समर्पितः, जातीकुसुमवासितः=जाती-कुसुमगन्धयुक्तः, मदगन्धेन = आहतहस्ति-मदजल-गन्धेन, तं गन्धम्=जातीकुसुमसोरम्, जानामि=अनुभवामि।
अर्थ—वसन्तसेना—तो नाम ही देखो।