मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)
Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary
महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा
DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ
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श्लोकानुक्रमणिका
६६१
| अङ्काः/श्लोकाः | अङ्काः/श्लोकाः | ||||
|---|---|---|---|---|---|
| आश्रमं वत्स गन्तव्यं | १० | ३२ | एतत्तु मां दहति | १ | १२ |
| आहणिऊण सरोसं | २ | २० | एताः पुनर्हर्म्यगताः स्त्रियो | १० | ११ |
| इ | एता निषिक्तरजतद्रव | ५ | ४ | ||
| इच्छंतं मम णेच्छति ति | ८ | ३७ | एताभिरिष्टकाभिः | ३ | ३० |
| इदं गृहं भिन्नमदत्तदंडो | ६ | ३ | एता हसन्ति च रुदन्ति च | ४ | १४ |
| इदं तत्स्नेहसर्वस्वं | १० | २३ | एतेन मापयति भित्तिषु | ३ | १६ |
| इदानीं सुकुमारेऽस्मिन् | ६ | ३६ | एते हि विद्यद्गुणवद्धकक्षा | ५ | २१ |
| इंदे प्पवाहिअंते | १० | ७ | एतैः पिष्टतमालवर्णकनिभैः | ५ | ४६ |
| इयं रङ्गप्रवेशेन कलानां | १ | ४२ | एतैराद्र्रतमालपत्रमलिनैः | ५ | २० |
| इयं हि निद्रा नयनावलम्बि० | ३ | ८ | एतैरेव यदा गजेन्द्र | ५ | १८ |
| इह सर्वस्वफलिनः | ४ | १० | एत्थ मए विण्णविदा | ६ | २५ |
| ई | एदं दोशकलंडिअं | ८ | ३६ | ||
| ईदृशे व्यवहारानौ | ६ | ४० | एदेहि दे दशणहुप्पल्ल | ८ | २० |
| ईदृशैः श्वेतकाकीयैः | ६ | ४१ | एव्वं दूलमदिक्कते | १० | ५३ |
| उ | एशा णाणकमूशिका | १ | २३ | ||
| उज्जाणेसु सहासु अ | ६ | ७ | एशाशि वाशू शिलशिग्ग | १ | ४१ |
| उट्ठन्तपडन्ताह | १० | ३६ | एशे गुणलअणणिही | १० | १४ |
| उत्कण्ठितस्य हृदयानुगुणा | ३ | ३ | एशे पडामि चलणेशु | ८ | १८ |
| उत्ताशिता गच्छसि | १ | १९ | एशे म्हि तुलिदतुलिदे | ८ | ४५ |
| उत्तिष्ठ भोः पतितसाधु | १० | ३१ | एष ते प्रणयो विप्र | १ | ४५ |
| उदयति हि शशाङ्कः | १ | ५७ | एष भो निर्मलज्योत्स्नो | ६ | २४ |
| उदयन्तु नाम मेघाः | ४ | ३३ | एषा फुल्लकदम्बनीप | ५ | ३५ |
| उन्नमति नमति वर्षति | ५ | २६ | एषासि वयसो दर्पात् | १ | ४७ |
| उपरितलनिपातितेष्टको | ३ | २२ | एसो असोअबुच्छो | ३ | ३१ |
| ऋ | एह्येहीति शिखण्डिना | ५ | ३२ | ||
| ऋग्वेदं सामवेदं गणितम् | १ | ४ | ऐ | ||
| ए | ऐरावतोरसि चलेव | ५ | २३ | ||
| एककार्यनियोगेऽपि | ६ | १६ | ओ | ||
| एतत्तद्धृतराष्ट्रवक्र | ५ | ६ | ओशलध देध मग्गं | १० | ३० |
| ओहारिओ पवहणो | ६ | १२ |