भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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राजाभिषेकप्रकरण १६३ अन्वयः—उत्तरायणे गुर्विन्दुशुक्रैः उदितैः, भौमार्क लग्नेशदशेशजन्मपैः बलान्वितैः राजाभिषेकः शुभः (स्यात्) । चैत्ररिक्तारनिशामलिम्लुचे नो (शुभः स्यात्) ॥ १ ॥ उत्तरायण सूर्य के रहते तथा बृहस्पति, शुक्र और चन्द्रमा ग्रहों के उदित रहते और मंगल, सूर्य, तात्कालिक लग्न का स्वामी, तात्कालिक दशा का स्वामी और जन्मलग्न का स्वामी बली हो तो राजाभिषेक शुभ होता है । चैत्रमास, मलमास, चौथि, नवमी, चतुर्दशी तिथि और मंगल दिन तथा रात्रि का समय अशुभ होता है, इसलिए इनमें राज्याभिषेक न करना चाहिए ॥ १ ॥ नक्षत्र तथा लग्नशुद्धि शाक्रश्रवः क्षिप्रमृदुध्रुवोडुभिः शीर्षोदये वोपचये शुभे तनौ । पापैस्त्रिषष्ठायगतैः शुभग्रहैः केन्द्रत्रिकोणायधनत्रिसंस्थितैः ॥ २ ॥ अन्वयः—शाक्रश्रवः क्षिप्रमृदुध्रुवोडुभिः शीर्षोदये वा उपचये शुभे तनौ, पापै- स्त्रिषष्ठायगतैः, शुभग्रहैः केन्द्रत्रिकोणायधनत्रिसंस्थितैः (राजाभिषेकः शुभः स्यात्) ॥२॥ ज्येष्ठा, श्रवण, हस्त, अश्विनी, पुष्य, मृगशिरा, रेवती, चित्रा, अनुराधा, रोहिणी, तीनों उत्तरा, इन नक्षत्रों में; मिथुन, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक वा कुम्भ लग्न में रहते अथवा जन्मलग्न वा जन्मराशि से तीसरी, छठी, गेरहवीं लग्न में और लग्न से तीसरे, छठे, गेरहवें स्थान में पापग्रहों के रहते तथा लग्न, चौथे, सातवें, दशवें, पाँचवें, नवें गेरहवें, दूसरे, तीसरे स्थान में शुभग्रहों के रहते राजाभिषेक शुभ होता है ॥ २ ॥ राजाभिषेक काल में ग्रहस्थित फल पापैस्तनौ रुङ्निधने मृतिः सुते पुत्रार्तिरर्थव्ययगैर्दरिद्रता । स्यात् खेडलसो भ्रष्टपदो द्युनाम्बुगैः सर्वं शुभं केन्द्रगतैः शुभग्रहैः ॥ ३ ॥ अन्वयः—पापैः तनौ रुग्, निधने पापैः मृतिः, सुते पापैः पुत्रार्तिः, अर्थव्ययगैः पापैः दरिद्रता, खे पापैः अलसः, द्युनाम्बुगैः पापैः भ्रष्टपदः स्यात्, केन्द्रगतैः शुभग्रहैः सर्वं शुभम् स्यात् ॥ ३ ॥ पापग्रह लग्न में हो तो रोग, आठवें स्थान में हो तो मृत्यु, पाँचवें स्थान में हो तो पुत्र-क्लेश, दूसरे या बारहवें स्थान में हो तो निर्धनता दशवें स्थान में हो तो निरुद्योग, सातवें या चौथे स्थान में हो तो राज्यच्युत और पूर्ण चन्द्रमा यदि लग्न से छठे, आठवें, बारहवें स्थान में स्थित हो तो