मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसुखमनि नाकु तोचुचुन्नदि. नामाट विनि प्रवे शिंपुमु. पिम्मट तेलियुनु. नीवडिगिन दानिकि बदुलु दीनिवले दानिवले नुंडुननि नेनु चॆप्पुपक्षमुन नीवुनु अट्लैयुंडुननि तलंतुवु. पिम्मट नीवु हरिचरण ध्यानमु चेसितिवेनि आ यमृतमुतो नितरमुनु साटिपेद्दितिवे, अट्लु चेयवच्चुना यनि वादमु चेयुदुवु. अन्दुचेत अनुभविंचिन नीके तेलियगलदु. मनस्सु : दानि स्वारस्यमु तेलिसिनने गदा? कुल : आ सुखमु नारदादुलके तेलियुनु. नामाट मात्रमे नम्मवलदु. नारदादुल नडिगिन चॆप्पुदुरु. अन्दु अंत सुखमु लेकुन्न वारट्लु संबंधपडु दुरा? मनस्सु : दीनिवले दानिवले नुंडुना यनि ने नडुगनु. नीवे बागुग योचिंचि येदैन नॊक्क वस्तुवुनकु बोल्चि यी विधमुग नुंडुननि चॆप्पुमु. कुल : दानितो सरियगु वस्तुवुंडिन गदा चॆप्पगलनु? सर्वें द्रियमुलकुनु सुखमु गलिगिंचुनट्टि दिव्यवस्तु वदि. दानितो समानमैनदि वेटॊक्कटि लेदु. ना माट नम्मुमु. ना माट विनुमु. निन्नु नम्मिये गदा “चिंतयामि हरिमेव संतत” म्मंटिनि. 11 मा भी र्मंदमनो विचिंत्य बहुधा यामीश्चिरं यातना नामीनः प्रभवंति पापरिपव स्स्वामिननु श्रीधरः, आलस्यं व्यपनीय भक्तिसुलभं ध्यायस्व नारायणं लोकस्य व्यसनापनोदनकरो दासस्य किं न क्षमः.