नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
DevanagariHindipublished309 पृष्ठ
पृष्ठ 129, कुल 309 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 129
( ६५ ) की। अतः दूसरे जन्म में ऐसा करना कि इस प्रकार दुःखभागिनी न होऊँ। [ गले में फन्दा डालती है ] चेटी (देख कर, घबराहट के साथ पास जाकर) बचाओ ! बचाओ ! ! यह राजकुमारी गले में फांसी लगाकर अपने प्राण दे रही है। नायक - (घबराहट के साथ पास जाकर) कहां है ? वह कहां हैं ? चेटी—यह अशोक वृक्ष के नीचे। नायक (हर्ष के साथ देखकर) हैं ! यह तो वही हमारी अभीष्ट प्रिया है ! (नायिका को हाथ से पकड़ कर लता के फन्दे को छुड़ाते हुए) हे सुन्दरी ! निश्चय ही ऐसा साहस नहीं करना चाहिए। पल्लव के समान कोमल इस हाथ को लता से हटा ले। मेरा विश्वास है कि जो तेरा हाथ फूल चुनने में (भी) समर्थ नहीं, वह फाँसी लगाने के लिए फन्दा कैसे पकड़ सकता है। नायिका- (घबराहट के साथ) सखी ! यह कौन है ? (अच्छी तरह देख
- सा + एव + इयम् + अस्मद् + मनोरथभूमिः । हमारी इच्छा का पात्र । अभीष्ट प्रिया । जिसे हम चाहते हैं ।
- मोहित करने वाली, सुन्दर, भोली-भाली, पगली, मूर्ख ।
- पकड़ता है ।