नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २६३ ) यह स्वर्ण चक्र तुम्हारे सम्मुख उपस्थित हो (अथवा, है); और चार दान्तों वाला यह सफेद हाथी, काले रंग वाला घोड़ा और मलयवती भी। ये तुम्हारे रत्न हैं। हे चक्रवर्ती (राजा) ! अच्छी तरह देख लो। और भी, देखो मेरे द्वारा प्रेरित, शरत् कालीन चन्द्रमा के समान निर्मल छोटे २ चँवर हाथों में लिए हुए, चञ्चल चूड़ामणि की किरणों से इन्द्रधनुष की पंक्तियां सी बनाते हुए, भक्ति भाव से सिर झुकाए हुए, ये मतङ्गदेव आदि विद्याधरों के राजालोग तुम्हें प्रणाम कर रहे हैं। तो कहो इस से अधिक और तुम्हारा क्या उपकार करूँ ? नायक- (घुटनों के बल बैठ कर) क्या इस से भी अधिक कोई प्रिय वस्तु है ? गरुड़ के मुख से यह शङ्खचूड बचा लिया गया है; गरुड़ विनीत हो गया है; उस के द्वारा पहिले खाए गए जो नागराज थे वे भी सब पुनर्जीवित हो गए हैं; मेरे फिर से प्राण धारण करने से माता पिता ने प्राण नहीं त्यागे; चक्रवर्ती पद भी मिल गया; (और) देवी, आप के साक्षात् दर्शन हो गए। फिर इस से बढ़ कर अधिक प्रिय वस्तु कौनसी हो सकती है जिस के लिए प्रार्थना की जाए ?
- हरिः = घोड़ा।
- विनता का पुत्र, गरुड़।