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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 117

११६ पद्मावत । सो पद्मावत गुरुहौं चेला । योगतन्त जेहिकारने खेला ॥ तजै वह बारै न जानौंदूजा । जेहि दिन मिलै यात्रा पूजा ॥ जीवकांढ़ भुइँधरौं ललाटूँ । वहिकहँ देउँ हियौ महँपाटूँ ॥ को मोहिंलै सो छुवावै पाया । नौ अवतारैं देइ नइ काया ॥ जीवचाहि सोअधिकैं पियारी । मांगै जीव देउँ बलिहारी ॥ मांगै शीश देउँ मैं ग्रीवां । अधिक तेरे जो मारै जीवा ॥ अपने जिवकर लोभ न मोहीं । प्रेम वार होय माँगौं ओहीं ॥ दो० दरशन वहकादिया जस, हों मुखिकारी पतंग । जो करवै शिर सारी, मरत न मोरों अंग ॥ पद्मावत कमला शशि ज्योती । हँसै फूल रोवै तब मोती ॥ परजापतें हँसी औ रोनूँ । लाये दूत होय नित्तँखोजू ॥ जबहिं सूर्य्य कहँलागाराहू । तबहिंकमल मनभयो अग़ाहूँ ॥ बिरह अगस्ते जोविसमो भयउ । सरवरे हरषे सूखसब गयउ ॥ परगटै ढारसकै नहिं अंशू । घुटघुट मांसगुंस होयनाशू ॥ जस दिनमांझ रयनिहोय आई । विगसतकमल गयो मुरझाई ॥ रांतौं बदन गयो होय सेताँ । भवंत भँवर रहिगई अचेता ॥ दो० चितहिं जो चित्र कीन्हधुने, रोवोंअङ्ग समीप । सहसै सालदुख आहभर, मुरछै परीकामीप ॥ पद्मावत सँग सखी सयानी । गनकेनखत पीरशशि जानी ॥ वास्ते १ छोड़ना २ दरवाज़ा ३ शिर ४-११ दिल ५ तख़्त ६ नया जन्म ७ बदन ८ ज्यादा ६-१० गरदन १२ शिर उतारना १३ चाँद १४ बाप पद्मावत १५ रोना १६ हररोज़तलाश १७ तथा राजारतनसेन १८ तथा पद्मावत १६ ख़बर २० आग २१ तेज २२ तालाब २३ खुशी २४ ज़ाहिर २५ छिपा २६ लाल २७ सफ़ेद २८ याद २६ तसवीर ३० पद्मावत ३१ हज़ार ३२ बेहोशी दूरहोती ३३ चाँद तथा पद्मावत ३४ ॥