रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)
Raghuvamsham of Kalidasa Hindi
महाकवि कालिदास द्वारा
स्रोत: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (उद्गम)
DevanagariHindipublished735 पृष्ठ
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श्लोकानुक्रमणिका
| श्लोकः | सर्गः | श्लोकः | श्लोकः | सर्गः | श्लोकः |
|---|---|---|---|---|---|
| यन्त्रप्रवाहैः शिशिरैः | १६ | ४९ | रघूणामन्वयं वक्ष्ये | १ | ९ |
| यमात्मनः सद्यनि सनि | ६ | ५६ | रघोरवष्टम्भमयेन | ३ | ५३ |
| यवनीमुखपद्मानां | ४ | ६१ | रजः कणैः खुरोद्धूतैः | १ | ८५ |
| यशोभिराब्रह्मसमं | १८ | २८ | रजोभिः स्यन्दनोद्भूतै | ४ | २९ |
| यः सुबाहुरिति राक्षसो | ११ | २९ | रणः प्रववृते तत्र भीमः | १२ | ७२ |
| यस्मिन्महीं शासति वाणि | ६ | ७५ | रतिस्मरो नूनमिमाव | ७ | १५ |
| यस्यात्मगेहे नयनाभि | ६ | ४७ | रतेर्गृहीतानु नयेन | ६ | २ |
| यस्यावरोधस्तनचन्द | ६ | ४८ | रथाङ्गनाम्नोरिव भाव | ३ | २४ |
| यां सैकतोत्सङ्गसुखोचि | १३ | ६२ | रथात्स यन्त्रा निगृहीत | १४ | ५२ |
| यासौ राज्यप्रकाशाभिर्व | १५ | २९ | रथी निष्षङ्गी कवची | ७ | ५६ |
| यावत्प्रतापनिविधरा | ५ | ७१ | रथो रथाङ्गध्वनिना | ७ | ४१ |
| यावदादिशति पार्थिव | ११ | ३ | रसातलादादिभवेन | १३ | ८ |
| यावन्नाश्यायते वेदिर्भि | १७ | ३७ | रसान्तराण्येकरसं | १० | १७ |
| युधाजितश्च संदेशात्स | १५ | ८७ | राघवान्वितमुपस्थितं | ११ | ३५ |
| युवां युगव्यायतबाहुं | ३ | ३४ | राघवास्त्रविदीर्णानां | १२ | ५१ |
| यूपवत्यवसिते क्रिया | ११ | ३७ | राघवोऽपि चरणौ तपो | ११ | ८९ |
| येनं रोषपरुषात्मनः | ११ | ६५ | राघवो रथमप्राप्तां ना | १२ | ९६ |
| योगनिद्रान्तविशदैः | १० | १४ | राजन्यप्रजासु ते कश्चिद | १५ | ४७ |
| योषितामुडुपतेरिवा | १९ | ३४ | राजर्षिवंशस्य रविप्रसू | १४ | ३७ |
| यौवनोन्नतविलासिनी | १९ | ९ | राजसत्वमवधूय मातु | ११ | ९० |
| र | राजापि तद्वियोगातंः | १२ | १० | ||
| रक्षसा मृगरूपेण व | १२ | ५३ | रांत्रावनाविष्कृतदीपभा | १६ | २० |
| रक्षोवघान्तो न च मे प्र | १४ | ४१ | रात्रिंदिवविभागेषु | १७ | ४९ |
| रघुनाथोऽप्यगस्त्येन | १५ | ५४ | रात्रिर्गता मतिमतां | ५ | ६६ |
| रघुपतिरपि जातवे | १२ | १०४ | राम इत्यभिरामेण | १० | ६७ |
| रघुमेव निवृत्तयौव | ८ | ५ | रामं पदातिमालोक्य | १२ | ८४ |
| रघुरश्रुमुखस्य तस्य | ८ | १३ | राममन्मथशरेण ता | ११ | २० |
| रघुर्भृ शं वक्षसि तेन | ३ | ६१ | रामस्तवासनदेशत्वाद्भू | १२ | २४ |
| रघुवंशप्रदीपेन | १० | ६८ | रामस्य मधुरं वृत्तं | १५ | ३४ |