भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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११६ राजतरंगिणी तं चामरमरुल्लोलकाकपक्षमृपासने । विधाय मन्त्रिणोऽश‍ृण्वन्प्रजानां धर्मसंशयम् ॥ ८१ ॥ ८१. चामर मरुत् द्वारा बालक के काकपक्ष उल्लोलित होते थे । उसे नृपासन पर बैठाकर मन्त्रीगण विवादों को सुनकर धर्म संशयों का सविधि निर्णय करते थे । इति काश्मीरको राजा वर्त्तमानः स शैशवे । साहायकाय समरे न निन्ये कुरुपाण्डवैः ॥ ८२ ॥ ८२. अस्तु यही कारण है । कौरव एवं पाण्डव दोनों पक्षों ने कश्मीर के राजा को शिशु जानकर महाभारत युद्ध में सम्मिलित होने के लिये आमन्त्रित नहीं किया था । श्लोक सं० ७ स्पष्ट उल्लेख करता है कि दोनों राजाओं में युद्ध हुआ । उसमें काश्मीर राजा पराजित हुआ । वीर गति प्राप्त किया । ८१ ( १ ) काक पक्ष : मस्तक के दोनों पार्श्व में बच्चों तथा क्षत्रिय युवकों में कुछ बाल छोड़ दिये जाते थे । मेरी बाल्यावस्था में मेरे घर में मस्तक के ऊपर लगभग एक चौथाई बनवाकर शेष बाल छोड़ देते थे । यह बाल रखने की प्रथा लुप्त हो गयी है । पठान तथा सीमान्त पश्चिमोत्तर प्रान्त के पुराने कुलीन लोग अब भी इस प्रकार के बाल रखते हैं । मैने अफगानिस्तान की अपनी यात्रा में प्रायः लोगो को इस प्रकार का बाल रखे देखा था । भारत में काबुली लोग अब भी इस प्रकार का बाल रखते हैं । ईरान मे इस फैशन को 'काकुल' कहते हैं । ( २ ) धर्मसंशय : यहाँ धर्मसंशय से अर्थ है— विवाद । दो पक्षो में अधिकार, अपराध, दण्ड आदि के विषयों में जब संशय उत्पन्न होता था और प्रचलित विधि के विषय में शंका उत्पन्न होती थी तो वह विषय अन्तिम निर्णय हेतु राजा के सम्मुख उपस्थित होता था । राजा को प्रतीक मानकर मन्त्रीगण राजा के नाम से राजा के सम्मुख निर्णय देते थे । राजा न्याय का स्रोत था । न्याय का संरक्षक था । अतएव राजा को सम्मुख रखकर मन्त्रीगण निर्णय लेते थे । पाठभेद : श्लोक संख्या ८२ में 'निन्ये' का 'नीतः' पाठ- भेद मिलता है । पादटिप्पणियाँ : ८२ ( १ ) महाभारत और कश्मीर राज : नीलमत पुराण का प्रारम्भ राजा जनमेजय की इस जिज्ञासा से होता है । महाभारत युद्ध स्थल में सभी देशो के राजा उपस्थित थे । किन्तु क्या कारण है कि कश्मीर मण्डल के राजा ने युद्ध में किसी पक्ष से भाग नहीं लिया । इस प्रश्न का उत्तर वैशम्पायन ने कश्मीर का राजा बालक होना दिया है : जनमेजय उवाच : महाभारतसंग्रामे नानादेश्या नराधिपाः । महायूथाः समायाताः पितॄणां मे महात्मनाम् ॥ ३ : ३ कथं काश्मीरिको राजा नायातस्तत्र कीर्त्तय । पाण्डवैर्धार्तराष्ट्रैश्च न वृतः स कथं नृप ॥ ४ : ४ कश्मीरमण्डलं चैव प्रधानं जगति स्थितम् । कथं नासौ समाहूतस्तत्र पाण्डवकौरवैः ॥ ५ : ५ किंनामाऽभूत् राजा च कश्मीराणां महाशयः । कथं वासौ निशम्यैतन्नायातश्चात्मना तदा ॥ ६ : ६