राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविजय कर्ताओ का कार्य क्षेत्र काश्मीर तक सीमित था। किन्तु पंडित मोतीलाल, उनके पुत्र पंडित जवाहरलाल और जवाहरलाल की पुत्री इन्दिरा गांधी का कार्य क्षेत्र समस्त भारतवर्ष था। वे भारत के भाग्य विधाता बने हैं। नि.सन्देह काश्मीर भूमि उनके जैसी दूसरी सन्तान उत्पन्न नही कर सकी है। भारतवर्ष का तिलक काश्मीर है। उस काश्मीर को शत-शत प्रणाम। कल्हण ने किसी राजाश्रय में किसी संरक्षण में किसी प्रश्रय में किया अर्थलाभ की दृष्टि से राजतरंगिणी की रचना नही की थी। मैने भी किसी राजाश्रय, किसी-संरक्षण तथा किसी प्रश्रय, अर्थ लोभ किंवा किसी भी स्वार्थ लोभ से यह पुस्तक नही लिखी है। अपनी अभिलाषा केवल इतनी ही है कि मेरा प्रयास कुङ्कुम-केसर की उत्पत्ति भूमि काश्मीर की मञ्जुल यशः सुगन्धि का अनुभव सहृदयजन को कराने में सफल हो। अपने परिश्रम, अपने अर्जित धन से पुस्तक संग्रह कर लिखा है। कल्हण की वाणी को प्रकाश में लाने का प्रयास किया है। यदि मै अर्थ लोभ किंवा किसी भी प्रकार की मुरापेक्षी भावना से लिखता तो मेरी लेखनी कुण्ठित हो जाती। मैं शब्दजाल का व्यापारी हो जाता। मेरा पुरस्कार अथवा सन्तोष इसी में है कि मैं यह कार्य कर सका। मै केवल इतने का ही आकाङ्क्षी हूँ कि सहृदयजन इसे समझने की कृपा करें। यह कार्य ज्ञात अज्ञात काश्मीर की उन महाविभूतियों के बिना आशीर्वाद के सफल नही होता जिनकी सुरभि से काश्मीर एवं जगत् आज भी सुरभित हैं। काश्मीर के उन महात्माओं तथा जनता को अंजली बद्ध नमस्कार करता हूँ। धर्म के प्रति आस्था होने के कारण कहना चाहता हूँ—ॐ नमः शिवाय—नमो बुद्धाय !! काश्मीरमयान्तः करण —रघुनाथ सिंह