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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

पृष्ठ 328, कुल 534 में से

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[Header] महारावत सामन्तसिंह २७१

सौंप दिया था, किंतु कुछ स्वार्थी लोगों ने पिता-पुत्र के बीच द्वेष उत्पन्न करा दिया, जिससे राज्य-कार्य में खराबी होने लगी । अपने उग्र स्वभाव के कारण कुंवर ने कतिपय मनुष्यों को, जो उसके कार्य में बाधक थे, मरवा डाला । अंग्रेज़ सरकार ने कुंवर के इस कृत्य से अप्रसन्न होकर उसको राज्य-कार्य से वंचित कर दिया और देवलिया में रहने की आज्ञा दी । तदनुसार कुंवर देवलिया में रहने लगा, परन्तु उसको वहां रहना पसन्द नहीं था, जिससे वह फिर प्रतापगढ़ में जाकर उपद्रव करने लगा । जब उसका उपद्रव चरम सीमा तक पहुंच गया तो अंग्रेज़ सरकार ने उसका दमन करने के लिए अपनी सेना रवाना की, जिसका कुंवर से मुक़ाबला हुआ । थोड़ी लड़ाई के बाद कुंवर अंग्रेज़ी सेना-द्वारा बंदी कर लिया गया¹ । महारावत ने उसको करनोरा (कनोरा) के क़िले में क़ैद रखना चाहा और इस बात का इक़रार भी वि० सं० १८८० मार्गशीर्ष सुदि १ ( ई० स० १८२३ ता० ३ दिसम्बर ) को कप्तान मेक्डॉनल्ड के नाम लिख दिया², परंतु यह बात अंग्रेज़

[Footnotes] (१) अर्सकिन; गैज़ेटियर ऑव् प्रतापगढ़ स्टेट; पृ० १६६ । (२) मूल इक़रार की प्रतिलिपि से । जी० वी० मैलिसन ने "हिस्टॉरिकल स्केचिज़ ऑव् दि नेटिव स्टेट्स ऑव् इंडिया" ( पृ० १३३-५ ) में भी कुंवर दीपसिंह को कनोरा के दुर्ग में रखने का उल्लेख किया है । इसी प्रकार 'वक़ाये राजपूताना' ( पृ० ५७७ ), 'हिंद राजस्थान' (गुजराती, अमृतलाल गोवर्द्धनदास शाह और काशीराम उत्तमराम पंड्या कृत; पृ० ६७५ ) आदि में भी ऐसा ही लिखा है । कनोरा प्रतापगढ़ राज्य के अन्तर्गत है, जिससे उसके वहां रहने से फिर वहां उपद्रव होने की संभावना थी । इस दृष्टि से उसका प्रतापगढ़ राज्य से बाहर अचरे की गढ़ी में रखा जाना ही ठीक प्रतीत होता है । बिशप हेबर अपनी यात्रा के समय ई० स० १८२५ ( वि० सं० १८८२ ) में प्रतापगढ़ भी गया था । वह अपनी पुस्तक 'नरेटिव ऑव् ए जर्नी थ्रू दि अपर प्रॉविंसेज़ ऑव् इंडिया' में लिखता है कि दीपसिंह ने तीन वर्ष पूर्व स्वयं अपने हाथ से तथा अन्य व्यक्तियों द्वारा छः आदमियों को मरवा डाला था। उसका पिता, वहां का राजा बड़ा सीधा