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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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२६४ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास हस्तक्षेप न होने तथा ईस्ट इंडिया कंपनी-द्वारा की गई संधियां बहाल रहने, प्रजा के स्वत्व, इज्जत, ओहदे तथा धर्म को अपने धर्म के समान ही मानने आदि का उल्लेख है¹ । महारावत दलपतसिंह-द्वारा सिपाही विद्रोह के समय पूर्ण सहायता दी गई थी, जिसकी सरकारी अफ़सरों ने भी पूर्ण सराहना की। फिर ग़दर समाप्त हो जाने पर अंग्रेज़ सरकार ने उसके लिए दो हज़ार रुपये के मूल्य की खिलअत भेजना तज़वीज़ किया और वॉइसरॉय लॉर्ड कैनिङ्ग तथा एजेंट गवर्नर जेनरल के महारावत के नाम के खरीते भी मेवाड़ के पोलिटिकल एजेंट मेजर टेलर-द्वारा भेजे गये² तथा उपर्युक्त खिलअत भी उसको यथा- समय प्राप्त हुई। सिपाही विद्रोह के समय महारावत की आज्ञानुसार उसके मन्त्री निहालचंद खासगीवाले, शाह भोजराज और जोधकरण पाडलिया ने अच्छी सेवा बजाई और उन्होंने प्रतापगढ़ क़स्बे की रक्षा का, जो मंदसोर के निकट है, अच्छा प्रबन्ध रखा एवं प्रतापगढ़ के इलाक़े में बाग़ियों-द्वारा कोई हानि न पहुंचने दी, जिसकी महारावत को बड़ी प्रसन्नता हुई और उसने उन लोगों की क़द्र की। अपुत्रावस्था में राज्य ज़ब्त करने की लॉर्ड डलहौज़ी की नीति को विग्रहकारी समझ ग़दर समाप्त होने के पीछे अंग्रेज़ सरकार ने भारत के [गोदनशीनी की सनद मिलना] देशी राजाओं का दत्तक पुत्र रखने का अधिकार वाजिब समझा। तदनुसार महारानी विक्टोरिया की आज्ञानुसार समस्त देशी राज्यों के पास लॉर्ड कैनिङ्ग के हस्ताक्षर-सहित सनदें भेजी गईं। तदनुसार अंग्रेज़ सरकार की ओर से प्रतापगढ़ राज्य में भी ई० स० १८६२ ता० ११ मार्च (वि० सं० १९१८ फाल्गुन सुदि १०) (१) वीरविनोद; द्वितीय भाग, पृ० १६८०-८८। मेरा उदयपुर राज्य का इति- हास; जि० २, पृ० ७८६ । (२) मेजर टेलर, पोलिटिकल एजेंट, मेवाड़ का महारावत दलपतसिंह के नाम का वि० सं० १९१७ आषाढ वदि १ ई० स० १८६० (ता० ४ जून) का पत्र।