रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपाषाण-चित्रों, रामायण, महाभारत और हरिवंश की कथाओं से विदित होता है कि वहाँ अति प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति फैली थी और रामकथा का व्यापक प्रचार था। ३२४ अनु० : ख्मेर-साहित्य की सब से कलात्मक रचना रामकेर्ति है जिसका रचयिता तथा रचना-काल अज्ञात है। (रामकेर्ति का उच्चारण—रे आमकेर अथवा रियामके होता है।) इसकी प्राचीनतम हस्तलिपियाँ १७ वीं शताब्दी की हैं, किन्तु वे अपूर्ण हैं। विश्वामित्र के यज्ञ के वर्णन से प्रारम्भ होकर इन्द्रजित्-वध पर उसकी कथा रुक जाती है (सर्ग १-१०)। किन्तु रामकियेन (श्याम के रामायण) से तुलना करने पर अनुमान किया जा सकता है कि सर्ग ८० रामकेर्ति का अन्तिम सर्ग नहीं है। रामकेर्ति के फ्रेंच अनुवाद से इसकी निम्नलिखित विशेषताएँ निर्धारित की जा सकती हैं। (१) लेखक कोई धार्मिक बौद्ध है जो नारायण का अवतार मानते हुए भी उनको बोधित्त्व की भी उपाधि देता है तथा कई स्थलों पर बौद्ध शब्दावली का प्रयोग करता है। (२) यद्यपि रामकेर्ति पर सेरीराम की गहरी छाप है, फिर भी लेखक ने वाल्मीकिरामायण तथा सेरीराम की कथाओं का समन्वय करने का प्रयत्न किया है। फलस्वरूप सेरीराम की अपेक्षा रामकेर्ति वाल्मीकीय रामायण के अधिक निकट है। सेरीराम में दशरथ की केवल दो रानियों का उल्लेख है, रामकेर्ति में तीनों के नाम वाल्मीकि के अनुसार ही दिये गये हैं। रामकेर्ति में रावण की सीता-स्वयंवर में उपस्थिति की ओर संकेत नहीं मिलता, सेरीराम के अनुसार रावण भी इसमें आया था। सेरीराम में राम स्वेच्छा से वन के लिए प्रस्थान करते हैं जब कि रामकेर्ति में कैकसी (कैकेयी) के अनुरोध से राम को निर्वासित किया जाता है। सेरीराम में लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा के पुत्र के वध का वृत्तान्त मिलता है, जिसका उल्लेख रामकेर्ति में नहीं है। ख्मेररचना में सीता जनक की दत्तक पुत्री मानी जाती हैं तथा राम द्वारा परित्यक्त होने पर वाल्मीकि के आश्रम में निवास करती हैं। सेरीराम में सीता महारेसि कली की दत्तक पुत्री हैं तथा त्याग के बाद उनके यहाँ रहती हैं। सेरीराम में हनुमान् राम के पुत्र माने जाते हैं, किन्तु रामकेर्ति के अनुसार वह वायु और अञ्जना की सन्तान हैं। (३) मलयन सेरीराम में भी निम्नलिखित सामग्री मिलती है जिससे स्पष्ट है कि ख्मेररामायण तथा सेरीराम का गहरा सम्बन्ध है। —एक असुर, काकरूप धारण कर विश्वामित्र यज्ञभङ्ग करने का प्रयत्न करता है और विश्वामित्र उसे मारने के लिए राम तथा लक्ष्मण को धनुष-बाण देते हैं। —जटायु-रावण-युद्ध में सीता की अंगूठी का उल्लेख। —लक्ष्मण द्वारा १४ वर्ष तक नींद तथा भोजन का त्याग। —लक्ष्मण और हनुमान् का युद्ध। —सुग्रीव को अपनी सामर्थ्य का विश्वास दिलाने के लिए राम सात तालों का एक ही बाण से भेदन करते हैं। ये सात ताल महाराज नाग की पीठ पर स्थित हैं। —सम्बूरान का वृत्तान्त जिसे हनुमान् राम के पास ले आते हैं। —सेतु बाँधने के समय मछलियों का उत्पात। —रावण के चित्र के कारण सीता-त्याग। वाल्मीकि द्वारा सीता के एक पुत्र की सृष्टि। राम-सेना से सीता के पुत्रों का युद्ध। (४) कथा निर्वहण मौलिक है।