भारतकोश
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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पृष्ठ 376

लक्ष्मीबाई ३६५ चूडे मँगवा कर गौस को अपने हाथ से पहिनाये । रानी हर्ष मे मग्न थी और गौस का खुरदरा चेहरा आसुओ से तर था । तीसरे पहर के उपरान्त कुमुक बदली । स्त्रियो ने तोपे हाथ में लीं और भीषण गोलाबारी शुरू कर दी । कामासिन टौरिया पर से रोज ने दूरवीन में से देखा । बगल में उसका फौजी डाक्टर लो था और पास ही मातहत जनरल स्टुअर्ट । रोज ने कहा, 'ओह ! स्त्रिया तोप चला रही हैं ! स्त्रिया गोला-बारूद ढो रही हैं । कुछ खाना-पानी बाट रही हैं । टूटी हुई दीवारो और कँगूरो की मरम्मत मे मदद दे रही हैं । इतनी तरतीब से, इतनी तेजी से हिन्दुस्थानियो को काम करते आज देखा ! अचरज होता है ।' लो ने दूरबीन हाथ में ली । देखते ही बोला, 'जनरल, पेड़ो की छाया में कुछ स्त्री-पुरुष काम कर रहे हैं । हमारा एक गोला उनके बीच में पडा । धूल फिकी । फिर भी वे सब वही के वही !' रोज ने और स्टुअर्ट ने भी निरीक्षण किया । स्टुअर्ट बोला, 'ये सब नेपोलियन हो गये क्या ?' लो ने कहा, 'तब झासी हमारा वाटरलू होगा ।' रोज ने मुस्कराकर झिडका, 'हिश, अभी बहुत घोर युद्ध करना पडेगा । यह रानी नेपोलियन नही, जोन आव आर्क सी जान पडती है ।' स्टुअर्ट ने कहा, इसको जिन्दा पकड सके तो कमाल होगा ।' उसी समय तार खटखटाया । मालूम हुआ कि पश्चिमी मोर्चा सबका सब तहस-नहस हो गया । स्टुअर्ट को पश्चिमी मोर्चे को फिर सँभालने की आज्ञा दी । वह चला गया । स्टुअर्ट के ब्रिगेड का अधिकाश दक्षिणी मोर्चे पर था । उसके दलनायक को रोज ने तार द्वारा आदेश दिया, 'बहुत जोर के साथ किले की दक्षिणी बुर्ज पर गोलाबारी करो । उस व्हिसलिंग् डिक को किसी तरह बन्द करो ।'