झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलक्ष्मीबाई ३६५ चूडे मँगवा कर गौस को अपने हाथ से पहिनाये । रानी हर्ष मे मग्न थी और गौस का खुरदरा चेहरा आसुओ से तर था । तीसरे पहर के उपरान्त कुमुक बदली । स्त्रियो ने तोपे हाथ में लीं और भीषण गोलाबारी शुरू कर दी । कामासिन टौरिया पर से रोज ने दूरवीन में से देखा । बगल में उसका फौजी डाक्टर लो था और पास ही मातहत जनरल स्टुअर्ट । रोज ने कहा, 'ओह ! स्त्रिया तोप चला रही हैं ! स्त्रिया गोला-बारूद ढो रही हैं । कुछ खाना-पानी बाट रही हैं । टूटी हुई दीवारो और कँगूरो की मरम्मत मे मदद दे रही हैं । इतनी तरतीब से, इतनी तेजी से हिन्दुस्थानियो को काम करते आज देखा ! अचरज होता है ।' लो ने दूरबीन हाथ में ली । देखते ही बोला, 'जनरल, पेड़ो की छाया में कुछ स्त्री-पुरुष काम कर रहे हैं । हमारा एक गोला उनके बीच में पडा । धूल फिकी । फिर भी वे सब वही के वही !' रोज ने और स्टुअर्ट ने भी निरीक्षण किया । स्टुअर्ट बोला, 'ये सब नेपोलियन हो गये क्या ?' लो ने कहा, 'तब झासी हमारा वाटरलू होगा ।' रोज ने मुस्कराकर झिडका, 'हिश, अभी बहुत घोर युद्ध करना पडेगा । यह रानी नेपोलियन नही, जोन आव आर्क सी जान पडती है ।' स्टुअर्ट ने कहा, इसको जिन्दा पकड सके तो कमाल होगा ।' उसी समय तार खटखटाया । मालूम हुआ कि पश्चिमी मोर्चा सबका सब तहस-नहस हो गया । स्टुअर्ट को पश्चिमी मोर्चे को फिर सँभालने की आज्ञा दी । वह चला गया । स्टुअर्ट के ब्रिगेड का अधिकाश दक्षिणी मोर्चे पर था । उसके दलनायक को रोज ने तार द्वारा आदेश दिया, 'बहुत जोर के साथ किले की दक्षिणी बुर्ज पर गोलाबारी करो । उस व्हिसलिंग् डिक को किसी तरह बन्द करो ।'