रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६८ रसतरङ्गिणी स्वेदनीयन्त्र जल अथवा द्रव द्रव्य (स्वरस, कषाय, काञ्जी, दुग्ध आदि) को एक हाँडी में भर कर फिर इस वस्त्र के ऊपर पाक्य (स्वेद्य) द्रव्य को रख ऊपर से किसी शराव से ढक दें, फिर इस हाँडी को चूल्हे पर चढ़ा कर पकावें। इस प्रकार जो स्वेदन द्वारा पाक किया जाता है उसे "स्वेदनीयन्त्र" विधान कहते हैं। (र. र. स.) पातनायन्त्र एक हाँडी जिसके पेंदे का व्यास १६ अंगुल हो, लें, उसको उलटाकर उसकी पीठ पर एक जलाधार (पाली या थांला) बनावें। जलाधार की लम्बाई १० अंगुल, चौड़ाई ८ अंगुल और ऊँचाई ४ अंगुल, होनी चाहिये। पश्चात् एक दूसरी हाँडी जिसका मुख पहिली हाँडी से कुछ कम चौड़ा हो और ऊपर की हाँडी के मुख में जा सके, लें। अब इस हाँडी को नीचे सीधी रखकर उसमें पारद या हिंगुल आदि द्रव्य डाल दें। तदनन्तर जला- धारयुक्त हाँडी को औंधा मुँह कर पारदयुक्त हाँडी के मुख को उस हाँडी के मुख में प्रविष्ट कर दें। दोनों हाँडियों की मुखसन्धि पर भैंस का दूध, चूना,