भारतकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished799 पृष्ठ

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पञ्चमस्तरङ्गः ७६ सिनी हरिद्रा, ऊर्णा मेषरोमाणि, अम्लजलेन काञ्जिकेन । अत्र च धूमादि- चूर्णानां भागाः पारदात् षोडशांशाः स्युः । मृगेक्षणा इन्द्रावारुणी, अंकोलः अंकोठः, "ढेरा" इति भाषायाम्, निशा हरिद्रा, एषां चूर्णैः । धूर्तः धत्तूरः, त्रिकण्टको गोक्षुरः, सकन्यकं कुमारीरससहितम् । ईशसंज्ञः पारदः ॥२२-२६॥ भा.टी.-पारद को घर का धुआँ, ईंट का चूर्ण, हरिद्राचूर्ण और बारीक काटी हुई ऊन के साथ एकत्र मिलाकर एक दिन मर्दन कर काञ्जी से धोकर साफ कर लेने से पारद का नाग दोष नष्ट हो जाता है । इन्द्रायण, अंकोला ( ढेरा ), हल्दीचूर्ण के साथ मर्दनकर काञ्जी से धोकर साफ कर लेने से पारद का वंगदोष नष्ट हो जाता है । चित्रक मूलचूर्ण के साथ पारद को मर्दन करने से अग्निदोष, तथा अमलतास की छाल के साथ पारद को मर्दन करने से मलदोष नष्ट हो जाता है । काले धतूरे के पञ्चांग या बीजों के साथ पारद को मर्दन करने से चपलदोष, त्रिफलाचूर्ण के साथ मर्दन करने से विषदोष नष्ट होता है । गिरिदोप को नष्ट करने लिये पारद को त्रिकटु ( सोंठ मिर्च पीपल ) चूर्ण के साथ और असह्याग्निदोष को दूर करने के लिये पारद को गोखरूचूर्ण के साथ मर्दनकर काञ्जी से धो लिया जाता है । उक्त दोषों को नष्ट करने के लिये जिन-जिन औषधियों का चूर्ण बताया गया है उनको पृथक्-पृथक् पारद से १६ वाँ भाग लेकर पारद में डालें और इसके साथ इसमें घीकुआर का रस भी घोटने के योग्य मिलाकर एक दिन मर्दनकर खट्टी काञ्जी से धोकर पारद को साफ कर लें । उक्त विधि से शुद्ध किया हुआ पारद निश्चित ही सामान्यतः कञ्चुक तथा नागादिदोषहीन हो जाता है ॥ २२-२६ ॥ द्वितीयः शोधनप्रकारः रसेश्वरं समसुधारजसा मर्दयेत् त्र्यहम् । ततो द्विगुणवस्त्रान्तर्गलितं खल्वके न्यसेत् ॥२७॥ रसोनं निस्तुषं तुल्यं तदर्धं लवणं हरेत् । तत्कल्के मर्दयेत्सूतं यावदायाति कृष्णताम् ॥२८॥ कृष्णां कल्कं परित्यज्य तथा प्रक्षाल्य युक्तितः । एवमेकेन वारेण रसेन्द्रः शुद्धिमाप्नुयात् ॥२९॥ श्रीमद्गुरुमुखोद्गीतः कृतश्च बहुशो मया । सौकर्यार्थं प्रयोगेषु प्रकारोऽयं प्रकाशितः ॥३०॥