भारतकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished799 पृष्ठ

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८२ रसतरङ्गिणी वक्तव्य—लाल ईंटों का चूर्ण, कम्बल की भस्म, बिना बुझा हुआ चूना रसोई का धुँवा, हल्दी, इन पाँचों द्रव्यों को समभाग में लेकर एकत्र कर लें, अब इससे आधा भाग पारद मिला नींबू के रस से एक दिन मर्दन कर डमरु यन्त्र में बन्द करके तीन घंटे की अग्नि देने से पारद ऊपर उड़कर शुद्ध हो जाता है। इसको सब काम में निःशंक होकर प्रयोग करना चाहिए। वक्तव्य—शुद्ध पारद को पान के पत्तों के रस के साथ खूब अच्छी तरह मर्दन करके उसका गाढ़ा सा कल्क बना लें। अब इस कल्क को एक कपड़े पर लेप करके शिर में बाँधने से शिर के बालों में होनेवाली सब यूका (जूँ) मरकर गिर जाती हैं। शुद्ध पारद दो तोला, सिक्थतैल (मोम का तेल) बारह तोला लेकर इन दोनों को एकत्र खरल में तब तक मर्दन करें जब तक कि पारा मोम के तेल में अच्छी तरह मिल न जाय। यह एक उत्तम मरहम है। यह मरहम शिश्नेन्द्रिय तथा गुद प्रदेश में होनेवाले बहुत पुराने भयंकर फिरंग रोग के व्रणों को निःसन्देह शीघ्र ही भर देता है। इति रस का सामान्य शोधन। अथ हिंगुलोत्थितपारदस्य निर्माणप्रकारः हिङ्गुलं पारिभद्रस्य रसैः सम्पेपयेद् बुधः । चाङ्गेर्या वा रसेनेव द्रवैर्जम्बरीरजैस्तथा ॥३८॥ ऊर्ध्वपातनयन्त्रेण सप्तकञ्चुकवर्जितम् । गृह्णीयान्निर्मलं सूतं रसतन्त्रविशारदः ॥ ३६ ॥ षोडशांशे निशाचूर्णैस्ततस्तं पेषयेद् बुधः । अम्लेन पटुना चापि मर्दयेद्वा दिनद्वयम् ॥४०॥ वस्त्रं चतुर्गुणीकृत्य ततो निःसारयेद्रसम् । योगेषु योजयेद् वैद्यो रसराजं सुनिर्मलम् ॥४१॥ गुरुदर्शितमार्गेण यन्त्रमानं प्रकल्पयेत् । मानाभावाद्रसेन्द्रस्य लिखितं नैव शक्यते ॥४२॥ अथ हिंगुलात् पारदनिर्माणप्रकारः- पारिभद्रः "फरहद" इति ख्यातः । जम्बीरनिम्बुनीरैर्वा हिंगुल मर्दनं पारदविश्लेषणार्थम् , उर्ध्वपातनेन पारदपातनं नागवङ्गादिदोषोप्रपनोदाय, ततश्च चूर्णैर्नांथवा लवणेनाम्लेन च मर्दनं निर्मली-