भारतकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished799 पृष्ठ

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६ पञ्चमस्तरङ्गः ८१ चतुर्थःशोधनप्रकारः—यामिनीः हरिद्रा। यवाग्रजो यवक्षारः सुवर्चिकः वर्जिङ्गारः कितवः धत्तूरः, अश्वसंख्यैः सप्तभिः ॥ ३२-३३ ॥ भा. टी.—गुड़, त्रिकटुचूर्णं, अजवाइन, पाँचों नमक, चित्रकछालचूर्णं त्रफलाचूर्णं, जवाखार, सज्जीखार, सुहागा, धतूरा बीज और सरसों, इन, सबको पृथक् समभाग में लेकर इनका चूर्ण पारद में बीसवाँ भाग डालकर सात दिन तक मर्दन करने से पारद शुद्ध हो जाता है ॥ ३२-३३ ॥ पञ्चमः शोधनप्रकारः नागवल्लीदलरसैस्तथा चार्द्रकजै रसैः । क्षारत्रययुतैश्चापि रसराजं त्रिमर्दयेत् ॥३४॥ ततस्तेभ्यः पृथक्कृत्वा सप्तदोषविवर्जितम् । मुक्ताफलसमाकारं रमराजं प्रयोजयेत् ॥३५॥ पञ्चमःशोधनप्रकारः—नागवल्लीदलरसैः ताम्बूलपत्ररसैः, क्षारत्रयं स्वजि- कासौभाग्ययवाग्रजाः ॥३४-३५ ॥ भा.टी.—पारद को पान के रस, अदरख और जवाखार, संज्जीखार तथा सुहागे के साथ मिलाकर तीन दिन तक मर्दन करें । फिर अम्लकाञ्जी या जल से धोकर पारद को पृथक् कर लें । इस विधि से शुद्ध पारद मोती के समान चमकीला और सप्तदोषरहित हो जाता है ॥ ३४-३५ ॥ षष्ठः शोधनप्रकारः विमर्द्य सुधया सप्तदिनं धूमनिषेष्टकैः । त्रिदिनं मर्दयेत्सूतं काञ्जिकैः क्षालयेत्ततः ॥ ३६ ॥ वस्त्रं चतुर्गुणं कृत्वा सूतं निःसारयेत्ततः । सप्तकञ्चुकनिर्मुक्तो जायते निर्मलो रसः ॥३७॥ इति रसस्य सामान्यशोधनम् । षष्ठः शोधनप्रकारः—सुगमः । चतुर्गुणवस्त्रेणेत्युपलक्षणं, शम्बरमृगच- र्मणा चात्यन्ततनुना पारदस्य गालनं कार्यमिति गुरुसम्प्रदायः ॥३६-३७॥ भा. टी.—पारद को पहिले चूने के साथ सात दित तक मर्दन करके चतुर्गुण ( चार तह ) वस्त्र से छान लें । फिर इसे घर का धुवाँ, हरिद्राचूर्ण तथा ईंट के चूर्ण में तीन दिन तक मर्दन करके काञ्जी से धोकर साफ कर लें । अब इस पारद को एक चौहत वस्त्र में रखकर छान लें । इस प्रकार शोधन करने से पारद सप्तकञ्चुक रहित तथा स्वच्छ हो जाता है ॥३६-३७॥

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