रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसप्तमस्तरङ्गः १६५ न त्रिकटु, त्रिफला तथा मरिच-चूर्ण और एरण्डतैल मिलाकर खूब कूट लें जिससे यह अवलेह सा बन जाय, इसमें पारदभस्म मिलाकर सेवन करना चाहिये । लहसुन के स्वरस तथा कल्क से पकाये हुए तिलतैल के साथ पारद भस्म सेवन करने से पुराने और नवीन सब प्रकार के वातविकार नष्ट हो जाते हैं। वातरक्त रोग में पारदभस्म को हरड़ और गिलोय के क्वाथ में गुड़ मिला कर सेवन करना चाहिये । अथवा हरड़ आदि का चूर्ण करके पारदभस्म सेवन करनी चाहिये । साँठ और एरण्डबीजचूर्ण से पहिले क्षीरपाक विधि के अनुसार दुग्ध सिद्ध कर लें, अब इससे प्रतिदिन एक या दो बार पारदभस्म सेवन करने से पुरातन गृध्रसी रोग उसी प्रकार शीघ्र नष्ट हो जाता है जैसे सूर्य से अन्धकार। बकुची, त्रिफला तथा भृंगराजचूर्ण के साथ पारदभस्म सेवन करने पर किलास (सफेद कोढ़) रोग नष्ट हो जाता है। उदरकृमियों के लिये इसको विडंग, नीम, दाडिमत्वक् , पलाशबीजचूर्ण के साथ मधु मिलाकर सेवन कराना चाहिये । त्वक् रोगों तथा कुष्ठ के लिए इसे निम्नलिखित तैल के साथ प्रयोग करना चाहिये । राई, चित्रकमूलत्वक् , लहसुन, नीममूलत्वक् , भांगरा और शुद्धभिलावा, प्रत्येक समभाग में लेकर सब तेल से चतुर्थांश तिलतैल, इनसे चौगुना अधिक तथा पाकार्थ जल तेल से चौगुना लेकर राई आदि द्रव्यों को जल के साथ पीसकर कल्क बना जल और तेल में मिला तेल पकाकर छान लें । अब इस तैल के साथ पारदभस्म का प्रयोग करें । इसके प्रयोग से सब कुष्ठ रोग नष्ट हो जाते हैं। शरीर की कृशता को दूर करने के लिये दो मास तक पारदभस्म को शतावरी, खरेंटी, असगन्ध और कदलीकन्द कषाय के साथ सेवन करना चाहिये । सौंचलनमक, त्रिकटु तथा हिंगु; इनका कल्क कर इसमें कल्क से चौगुना गोघृत और उससे चौगुना गोमूत्र मिलाकर घृत सिद्ध कर लें । इस घृत के साथ सात दिन तक पारदभस्म का सेवन कराने से सब प्रकार के अपस्मार रोग नष्ट हो जाते हैं । मुलेठी, कबूतर की विष्ठा तथा मनःशिला प्रत्येक समभाग ले लेकर चूर्ण करके इसमें पारदभस्म मिला आँखों में अञ्जन करने से भयंकर लक्षणयुक्त उन्माद रोग शीघ्र नष्ट हो जाते हैं । पारदभस्म को मधु में मिला चाट करके अनुपान रूप में मधुमिश्रित गुनगुना जल पीने से बहुत पुराना चर्बी बढ़ने से होनेवाला मोटापा दूर हो जाता है । त्रिफला, शिलाजीत तथा त्रिकटुचूर्ण को भांगरे के रस की सात भावना देकर इस चूर्ण के साथ पारदभस्म सेवन करने से सम्पूर्ण प्रमेह रोग नष्ट हो जाते हैं ।