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रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished799 पृष्ठ

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चपलनिर्णयः २१७ during the relaxation, impotence, lewd thoughts, but physically unable, erections slow insufficient." Samuel Lilienthal M. D. "सत्त्वोभावसादं शुक्रदौर्बल्यम्, क्षोभोदर्कः कृतोऽकृतो वा वीर्यस्रावः, मानसो विक्षोभः, शिरःशूलम्, पक्षाघातेष्विव मेरुदौर्बल्यम्, असङ्ग- मोत्सुकत्वेऽपि पौरुषग्रन्थिद्रवस्रवणम्, शुक्रस्य बिन्दुशः स्रवणं चेन्नाम शयानस्य मूत्रणोपवेशनान्तरं वा, यच्च विश्रान्तिक्राले वृद्धिशीलम्, मैथुनाक्षमत्वम्, असम्मताः भोगसङ्कल्पाः, परं रतिक्रियायामसामर्थ्यम्, मन्दमपूर्णाञ्च ध्वजोत्थानम्।" एभिरुद्धरणैः सेलिनियमस्यातिवृष्यत्वं देहलोहकरत्वञ्च परिस्फुटं प्रतिपादितम्। किमधिकम् ? स्वरूपगुणयोः सादृश्यात्समञ्जसमस्माकं निश्चयो यच्चपलः सेलिनियम एव। प्रसङ्गवश चपल का निर्णय लिख रहे हैं भा.टी—गौर, श्वेत, अरुण, कृष्ण, यह चार भेद चपल के होते हैं। इनमें जो सुवर्ण की तरह होता है वह गौर है और जो चाँदी की तरह होता है वह श्वेत है—यह दोनों पारद का बन्धक करते हैं। जो अरुण और कृष्ण होते हैं वह शीघ्र आग में रखने पर पिघल जाते हैं, इसलिए निष्फल हैं। वंग (रांगा) की तरह अग्नि में गल जाता है, अतः चपल कहा जाता है। चपल दोषों को शरीर से बाहर निकालनेवाला, देह को लोह तुल्य बनाने- वाला, पारद का सहायक, तिक्त, उष्ण, मधुर, स्फटिक-मणि की तरह, षटकोण, स्निग्ध, गुरु, दोष को दूर करनेवाला, वृष्य और पारद को बन्धन करनेवाला है। किन्ही आचार्यों के विचार से चपल का पाठ महारसों में है। इनकी शुद्धि करनी हो तो—जमीरी नीम्बू, खेखसा और अदरक के स्वरस से ३ भावना देनी चाहिये ॥१-५॥ शुद्ध चपल को लेकर आरनाल उपविष (धत्तूरादि) और विष, (वत्सना- भादि) यथालाभ द्रव्यों के साथ पीसकर एक गोल सा बना ले फिर सत्त्वपातन विधि के अनुसार सत्त्वपातन कर लें ॥६॥ वक्तव्य—दुर्भाग्यवश आयुर्वेदज्ञ वैद्यों में ऐसे विद्वान् अन्वेषक की कमी है जो अपने रिसर्च द्वारा संदेहास्पद द्रव्यों का निर्णय कर जनता के सामने उपस्थित करें। अथवा ऐसी कोई सभा भी नहीं है जो सन्देहास्पद द्रव्यों का निर्णय करे। फलतः इसका असर बहुत बुरा होता है और बहुत सी औषधियाँ

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