रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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१३८ रसतरङ्गिणी रम्भाद्र्कन्दजरसैरपि भावयित्वा तुर्यांशटङ्कणकणालपकर्मानयुक्तम् ॥६२॥ संमेल्य सैरिभमलञ्च विधाय पिण्डान कोष्ठ्यां निधाय च ततः प्रथमेद् दृढाग्नौ । अभ्रं विमुञ्चति ततो निजसत्त्वमाशु प्रायः प्रयोगनिवहेषु नियोजयेद्वै ॥ ६३ ॥ अथान्यः प्रकारः-अभ्रचूर्णं काञ्जिकेन सूरणतोयेन कदलीकन्दलेन च पिष्ट्वा टङ्कणं पिप्पलीं क्षुद्रमत्स्यांश्चैकीकृत्य तच्चतुर्थांशं मेलयेत् । सैरिभमलं महिषी- मलम् ॥ ६२, ६३ ॥ भा.टी.-अभ्रकचूर्ण को काञ्जी, जिमीकन्दस्वरस, कदलीकन्दस्वरस से पृथक् मर्दन करके अन्त में इसमें चतुर्थांश सुहागा, पिप्पलीचूर्ण और छोटी- छोटी सुखाई हुई मछलियों का चूर्ण, और भैंस का गोबर मिलाकर गोले से बनाकर सुखा लें ।