रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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वङ्गभस्म में शिलाजतु मिलाकर शहद से एक मास तक निरन्तर सेवन करने से प्रमेह रोग नष्ट हो जाते हैं । और इसी योग के सेवन से क्षीणशुक्र, अल्प- शुक्र, शुष्कशुक्र, दुर्बल और दूषितशुक्र पुरुषों की वीर्यवृद्धि होती है । वङ्गभस्म को गोघृत में मिलाकर चाटने से पाण्डुरोग शीघ्र ही दूर हो जाता है । टङ्कणचूर्ण मिलाकर वंग सेवन करने से गुल्म रोग नष्ट हो जाता है । अग्निमान्द्य को दूर करने के लिये वङ्गभस्म में पिप्पलीचूर्ण मिलाकर सेवन कराया जाता है । सुपारी- चूर्ण के साथ वङ्ग सेवन से अजीर्ण रोग नष्ट होता है । हरिद्राचूर्ण या स्वरस के साथ वङ्ग का सेवन करने से ऊर्ध्ववायु (डकारों का आना) तथा रक्तपित्त रोग में आराम आता है । व्रणमेह (सुजाक) में वंगभस्म में रससिन्दूर मिलाकर कच्ची हल्दी के स्वरस से सेवन करने से आराम आता है । वरुणादिगणोक्त द्रव्यों के क्वाथ के साथ वंगभस्म का सेवन करने से व्रणों में आराम आता है । मुख की दुर्गन्ध को दूर करने के लिये वंगभस्म में कर्पूर मिलाकर चम्पास्वरस के साथ सेवन करना चाहिये । वीर्यस्तम्भन के लिये वंगभस्म को कस्तूरी के साथ मिलाकर सेवन करना चाहिये । शुक्र-धातु की पुष्टि के लिये इसमें जायफल और मधु मिलाकर कुछ काल सेवन करना चाहिये । त्वग्रोगों को दूर करने के लिये वंगभस्म को खैर की छाल के कषाय के साथ सेवन करना चाहिये । शुक्र धातु की विकृति को दूर करने के लिये वंग को समुद्रफेनचूर्ण में मिलाकर सेवन करना चाहिये । एक से दो रत्ती मात्रा में वंगभस्म लेकर उसमें अपामार्गचूर्ण मिलाकर कुछ काल निरन्तर सेवन करने से नपुंसकता नष्ट हो जाती है । वीर्यवृद्धि के लिये वंगभस्म में सेमर की मूसली का चूर्ण और हरिद्राचूर्ण मिला- कर मधु के साथ चटाने से कुछ दिनों में वीर्यवृद्धि हो जाती है । शुक्र की अधिक उत्पत्ति के लिये वंगभस्म में छोटे सेमर की मूसली का चूर्ण और अभ्रकभस्म मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है । शरीर में पित्त की वृद्धि को कम करने के लिये वंगभस्म में खांड़ मिलाकर सेवन कराया जाता है । यदि शारी- रिक दाह को शान्त करना हो तो वंगभस्म को नींबूस्वरस के साथ सेवन कराना चाहिये । तुलसीपत्रकल्क या स्वरस के साथ वंग सेवन करने से प्रमेह रोग नष्ट हो जाते हैं । पान के पत्तों के रस के साथ वंगभस्म सेवन करने से मलबन्ध दूर हो जाता है । श्वेतप्रदर के लिये वंगभस्म में लोहभस्म, शुक्तिभस्म तथा रालचूर्ण मिलाकर दो रत्ती मात्रा में कुछ काल तक सेवन कराया जाता है । मुख की झाईं और काले दागों को मिटाने के लिये वंगभस्म को खरगोश के