रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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तीव्र अग्नि को सहन करनेवाली ईंटों की कोष्ठी (भट्ठी) बनायी जाती है। इस कोष्ठी में चूने के पत्थर इसलिए रखे जाते हैं कि यह लोहे में विद्यमान अन्य अशुद्धियों को फास्फेट, सिलिकेट गन्धित आदि से मिलकर उन्हें कैल्शियम के फास्फेट आदि के रूप में परिवर्तित कर देता है। वह कैल्शियम सिलिकेट आदि नीचे गिरते-गिरते पिघल जाते हैं। किन्तु हल्के होने से लोह के ऊपर तैरते हैं और लोहे का मैल कोष्ठी के पार्श्व में कुछ ऊँचाई पर बने हुए छिद्र से बाहर निकलता रहता है, इसे ही लोहकिट्ट या मण्डूर कहा जाता है। इस विधि से प्राप्त लोहे को ढलवालोह या मुण्डलोह कहते हैं। इसमें समभाग २½% प्रति- शत कार्बन होती है। यह मुंडलोह भंगुर, कठोर, भूरा सा और अपेक्षाकृत शीघ्र द्रवणशील होता है। इसके खंड को गरम कर पीट करके दूसरे टुकड़े से नहीं मिलाया जा सकता है। शुद्ध लोह—उपर्युक्त प्रकार से प्राप्त लोह को फिर कोष्ठी में रखते हैं जिसमें धौंकनी द्वारा अन्दर हवा पहुँचायी जाती है। इस क्रिया से लोह में विद्य- मान सारा कार्बन जल जाती है। फिर वह लोहा मृदु तथा अभंगुर हो जाता है और शीघ्र नहीं पिघलता है। इसके दो खण्डों को गरम करके मिलाया जा सकता है। इसमें २ प्रतिशत कार्बन होती है। इसी को मृदुलोह भी कहते हैं। तीक्ष्ण लौह—यदि भट्ठी में पिघले हुए पूर्वोक्त लौह में ढलवे लोहे की उचित मात्रा डाल दी जाय तो वह तीक्ष्णलोह या फौलाद बन जाता है। यह ढलवे लोह के समान कठोर और मृदुलोह के समान मृदु भी होता है। किन्तु ढलवे लोह के सदृश भंगुर नहीं होता और मृदुलोह की अपेक्षा शीघ्र पिघल जाता है और इसके दो खंडों को गर्म करके मिलाया भी जा सकता है। इसकी विशे- षता यह है कि इसकी कठोरता को न्यूनाधिक कर सकते हैं। यदि इसे लाल ताप तक पहुँचा कर शीघ्र ही शीतल जल में डाल दें तो यह अत्यन्त कठोर होकर काँच को भी काटनेवाला बन जाता है। परन्तु साथ ही भंगुर होता है। और गर्म करके धीरे-धीरे ठंडा होने दें तो यह मृदुलोह के समान मृदु तथा अभंगुर हो जाता है। लोहे का द्रवणांक (Melting Point) 15250 Centi- grade, Atomics भार 56.0, Density (पानी से कितना गुना भारी है) 7.45 है। लोह में जितना अधिक भाग Carbon (कोयला) का होगा उतना न्यून उसका द्रवणांक हो जाता है।