भारतकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

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एकविंशस्तरङ्गः ५६७ शीलितं नाशयेत्येष हिक्कामिहसमुत्थिताम् ॥ २५० ॥ सर्जिकाक्षारसंयुक्तं कासीसं परिशीलितम् । मासमात्रप्रयोगेण रक्तसञ्जननं परम् ॥ २५१ ॥ धत्तूरगुञ्जाबीजाढ्यः खगस्तु परिलेपितः । मासद्वयप्रयोगेण श्वित्रं हन्ति चिरोत्थितम् ॥ २५२ ॥ वाकुचीबीजरजसा खगः खलु सगैरिकः । मासद्वयं प्रलेपेन श्वित्रं हन्यात्सुदारुणम् ॥ २५३ ॥ कासीसस्य द्रवो बस्तियोगेन विनियोजितः । विनिहन्ति गुदभ्रंशमर्शांसि च विशेषतः ॥ २५४ ॥ अस्य च रोगयोग्यः प्रयोगः—प्लीहशत्रुः शरपुङ्खा, सहासारः कुमारीक्षारः “मुसम्बर” इति ख्यातः, दारुसिता त्वक्, सुराष्ट्राजा स्फटिकी। दन्तकृमिषु स्फुटि- क्यादिभिः सहकासीसं जलेन सम्मर्द्य क्षुद्राः गुटिका कार्याः । एकां गुटिकां च सन्दंशेन गृहीत्वा छिद्रे स्थापयेत् । शिष्टं सुबोधम् ॥ २४३-२५४ ॥ भा.टी.—कासीसचूर्ण को शरपोंखाक्षार में मिलाकर गरम जल अथवा कुमारीस्वरस (मुसम्बर) के साथ सेवन करने से भयंकर प्लीहावृद्धि में आराम आ जाता है। स्त्रियों के मासिक का कष्ट अर्थात् माहवारी रुकने के कारण कष्ट होने पर कासीस को सुहागा और मुसम्बर चूर्ण में मिलाकर सेवन करने से शीघ्र आराम आता है। रक्त की कमी के कारण होनेवाली हृदय की घबराहट (पल- पिटेशन) में कासीसचूर्ण को दालचीनी और एलुआचूर्ण में मिलाकर प्रयोग करने पर आराम आता है। वीसर्पशोथ को रोकने के लिए या कम करने के लिए कासीसजल में कपड़े को भिगोकर वीसर्प के शोथयुक्त प्रदेश पर रखने से आराम आता है। व्रण अच्छा होने पर उस स्थान पर की त्वचा को एक-सा वर्ण देने के लिए कासीस को त्रिफलाक्वाथ में घोलकर इस जल से दिन में कई बार लेप किया जाता है। दाँत में कीड़ा लगने पर कासीस को फिटकरी, हींग और देवदारुचूर्ण के साथ एकत्र पीसकर गोली-सी बना कर दाँत में रखने से कृमिदन्त रोग में आराम आता है। शुद्ध कासीसचूर्ण को एरण्डबीज, निम्ब- बीज और रसौंतचूर्ण के साथ एकत्र पीसकर चार-चार रत्ती की गोली बना लें। इन गोलियों को प्रतिदिन दिन में तीन बार जल से कुछ दिन सेवन करने से पुराना वीसर्प भी शान्त हो जाता है। हिक्का को बन्द करने के लिए एक रत्ती कासीस को चार रत्ती कैथ के गूदे में मिलाकर सेवन कराया जाता है। शरीर