भारतकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished799 पृष्ठ

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चतुर्विंशस्तरङ्गः ७२७ कौंचबीजचूर्ण, काकड़ासिंगीचूर्ण, प्रत्येक दो-दो तोला लेकर सब को एकत्र खरल में डालकर इसको भांग के स्वरस की सात भावना तथा गुलाब के पुष्प- स्वरस की सात भावना देकर तीन-तीन रत्ती की गोलियाँ बना लें । इस रस को “त्रैलोक्यसम्मोहनरस” कहते हैं । इसके सेवन से यौवनोन्मत्त स्त्री वश में हो जाती और भोजन में पूर्णरुचि होती है । यह रस नपुंसकता को नष्ट करने में सर्वोत्तम माना जाता है । इसके सेवन से मनुष्य के शरीर में प्रेम और उत्साह पैदा होता है । धारणा और स्मरण शक्ति तथा शुक्रस्तम्भन शक्ति (Retention power) बढ़ जाती है ॥४३१-४३६॥ अथ गुञ्जाया नामानि गुञ्जा रक्ता रक्तिका च ताम्रिका कृष्णचूडिका । उच्चटा शीतपाकी च भिल्लभूषणिकारुणा ॥४३७॥ चूडामणिस्ताम्रिका च शिखण्डी कृष्णला तथा । काकणन्ती च काम्भोजो सैवेह परिकीर्तिता ॥४३८॥ अथ गुञ्जानामानि तन्त्रव्यवहृतानि । भिल्लभूषणिका अरुणा इति च्छेदः ॥ भा.टी.—गुञ्जा, रक्ता, रक्तिका, ताम्रिका, कृष्णचूडिका, उच्चटा, शीतपाकी, • भिल्लभूषणिका (भीलों का आभूषण), अरुणा, चूडामणि, शिखण्डी, कृष्णला, काकणन्ती, काम्भोजी—ये सब नाम रत्ती के कहे जाते हैं ॥४३७, ४३८॥ वक्तव्य—सफेद और लाल भेद से रत्ती दो प्रकार की पायी जाती है । परन्तु दोनों की बेल एक सी होती है, केवल बीजों में अन्तर होता है । चिकित्सा में लाल गुञ्जा की अपेक्षा श्वेत को अधिक विषैला माना जाता है । अतः बाह्य प्रयोग में ही अधिक रूप से श्वेत तथा रक्त गुञ्जा का वर्णन पाया जाता है । शोधन करके अन्तःप्रयोग करने में कोई हानि नहीं होती है, किन्तु अशुद्धा- वस्था में सेवन करने से शरीर में विषैले लक्षण उदय हो जाते हैं । गुञ्जा की लता भारत में सर्वत्र प्रायः पर्वतों पर अधिक पायी जाती है । इसकी लता वृक्ष और दीवारों तथा अन्य आश्रयों पर चढ़ी रहती है । इसका काण्ड पतला, मृदुत्वङ्मय, पत्रसंयुक्त (Compound), पक्षाकार (Pinnate) पत्तियाँ, इमली या आमलकी के तुल्य क्षुद्र, लम्बी, रस में मधुर, पुष्प क्षुद्र पीताभ, शिम्बी तुल्य, फल शिम्बी रूप (Pod or Lagumlike) इसके अन्दर बीज होते हैं । इसमें पुष्प शरत्काल में आता है । फल पकने पर लता शुष्क हो